कहानी बिहार के मजदूर अबुलेस अंसारी की, जिसने “आपदा को अवसर” में बदला, मजदूर से बना बिजनिसमैन, जानिए

देश में को’रो’ना काल मे किसी ने अपनी नोकरी से हाथ धोए है तो किस को ऐसे हालतों में भी रोजगार ही नही बल्कि कम्पनी खोलने तक का भी मौका मिलगया है। हम आपकों मिलाने जा रहे है बिहार के पश्चिमी क्षेत्र चम्पारणजिले के अबुलेस अंसारी के बारे में । जिन्होंने करीब 4 से 5 साल तक कश्मीर की एक कम्पनी में रहकर बेट बनाने का काम शुरू किया। अंसारी कश्मीर से बिहार फरवरी में आ गए थे और लोक डाउन की वजह से यही पर ही फस गए।

उन्होंने बिहार में ही कुछ दोस्तों को बेट बनाकर भी दिए। उसके साथ काम करने वाले 9 ओर साथियों के साथ ये बेट बनाकर दिए और पैसे भी कमाए। इन कारीगरों की बात और इनके संघर्ष को भस्कर अखबार में छापा गया तो इसकी बात जिले के डीएम तक भी पहुँच गई। जिले के डीएम भी इन लोगो की मदद कर रहे है। बीते मंगलवार को ही इनकी कम्पनी को जीएसटी नम्बर भी मिल चुका है।

abulesh ansari

लोक डाउन में गांव के लोगो के साथ मिलकर बेट भी खेलते थे। उसवक्त उन्होंने बेट बनाकर भी दिए और लोगो को इतने पासन्द आए की अबुल्स ने इसको 800 रुपए तक भी बेच दिए। 29 मई को अबु लेस की इस खबर को भास्कर में छापा गया। उनको इस खबर के छपने के बाद न सिर्फ उनके पास मीडिया वाले पहुचे लेकिन प्रशासन भी उनके पास पहुँच गया।

मीडिया से बात करते हुए अबु लेस बताते है कि खबर छपने के बाद उनको मदद भी मिल रही है और वो मशहूर भी हुए है। कम्पनी का नाम, बेनर, स्टैम्प बन चुका है। अगले एक दो दिन मेंकम्पनी के नाम का करंट अकाउंट भी मिल जाएगा। अबु लेस और उनके साथियों को जिले के डीएम ने मिलनेभी बुलाया है।प्रशसन उनके डीपीआर के बाद उन्हें करोबार शुरू करने के लिए अर्थिके मदद भी करेगा।

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अबू लेस ने बताया है कि वो अपना कारोबार को आगे भी बड़ाएगे। बिहार में रहने वाले और दुकानदारों ने अबू लेस से कहा है कि आपने हमारा कारोबार को ठप कर दिया है। लोकल बेट 300 400 में मिलते है और आप बेट बनाकर हमे रिटेल कर सकते है। क्योकी आप हाथ से बनाकर इस बेट को सस्ते में भी बेच रहे है।

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