अगर ख़्वा’ब में मु’र्दा श’ख्श कुछ आकर बताए तो ..? मौ’लाना ने फ़’रमाया कि

अ’स्सा’लमु आ’लै’कुम प्या’रे इ’स्ला’मी भा’इ’यों और ब’ह’नों। आज हम आपको बहुत ही अ’च्छी जा’न’का’री देने जा रहे। आप पोस्ट को पूरा पढ़े और पोस्ट अच्छी लगे तो आगे अपने दी’नी भा’ई तक इ’से प’हुँ’चा’ए। दु’नि’या में आए हुए हर व्यक्ति को इस दु’नि’या से जा’ना ज’रूर है ,फ़’ना होना है। इ’स्ला’म ध’र्म के अ’नु’सार हर इं’सान को मौ’त का म’ज़ा च’ख’ना है ,मौ’त ब’रह’क़ है । इ”स्ला’म ध’र्म में मौ’त का कई बार जि’क्र किया गया है।

इससे इं’सा’न को स’ब’क लेने के लिए बार बार कहा गया है ,ताकि वो बु’रे का’म से रु’का र’हे।जब को’ई इं’सा’न म’र जाता है तो वह बि’ना अ’ल्ला’ह कि म’र्जी की जिं’दा नहीं होता है। लेकिन अक्सर लो’ग ख्वा’ब में मु’र्दो से मिलते है, उनसे बा’ते करते है, सो’ह’ब’त सीखते है, हि’दा’य’त देते है। अक्सर लो’ग नीं’द से बे’दार होने के बाद अपना ख्वा’ब है’रान और परे’शा’न हो जाते है। आज उन्हों’ने या किसी ने भी एक मु’र्दे से बात करी।

शा’य’द वो कोई भी हो सकता है ,जिसे आप जा’न’ते है वो भी हो स’क’ता है या फिर आ’प जि’से नहीं जा’न’ते वो भी हो सकता है। उसका अ’जी’ज भी हो सकता है , आपका रि’श्ते’दा’र भी है। वो आपका प’डो’सी भी हो सकता है या आ’प’को चा’ह’ने वाला भी हो सकता है। ह’ज’र’त इ’ब्रा’हि’म कि’र’मा’नी का बयान करते हुए फरमाते है कि अगर कि’सी ने ख्वा’ब में देखा है कि मु’र्दा जिं”दा’ हो गया है कि उसका ह’ल ने’क होगा। खासकर जब मु’र्दे को खु’शहा’ल और कु’शा’रा दे’खे।

किसी जिं’दा इं’सा’न को मु’र्दा देख लिया तो उसका हा’ल ब’दत’र होगा। अगर ये इं’सा’न बद’तर ओर जा’लि’म है तो। अगर कोई अपने मु’र्दा वा’लिद को इस तरह देख ले कि वो खु’श दि’खा’ई दे र’हे है तो और पा’की’जा लि’बा’स प’ह’ने हुए है तो ऐसे फ’र्द को दौ’ल’त मि’लने का इ’म’का’न हो’गा। या फिर ने’की का कोई ब’ड़ा का’म करेगा। अगर ख्वा’ब में मु’र्दा माँ को जिं’दा देखे’गा तो उसका न’सीब अ’च्छा हो’गा या फिर त’क’ली’फों से नि’क’ले’गा।

ख’वा’ब में अगर मु’र्दे को अपने हा’थ बे’त’क’ल्लुफी से देखने जैसे उसने ग’र्द’न में हा’थ डा’ल रखा है तो उसकी ल’म्बी उ’म्र होगी। अगर किसी मु’र्दे को बिना लि’बा’स के देखा है तो उसका हा’ल ब’द’तर होने की अ’ला’म’त है। इसके लिए ज’रू’र’त क”रने की इजा’ज’त है तो दु’आ करने की जरूरत है। जो भी इं’सा’न किसी को भी देखे उसके लिए दु’आ और खे’रात करने की जरूरत है। उस दिन स’द’का ला’जमी करे।

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