मिलिए अनिल कुमार चौहान से, जो कुरान की आयतों और कलिमात को मस्जिद की दीवारों पर लिख देते है और ..

किसी भी इंसान की कला उसका भविष्य लिखती है। हैदराबाद के अनिल कुमार चौहान अपनी कैलीग्राफी की कला की वजह से हैदराबाद में नही बल्कि इ’स्ला’मिक जगत में भी लोक प्रिय हो गए है। उनके दादा और पिता दोनो ने ही साइनबोर्ड पेंट भी किया करते थे,

उन्ही के नक्शेकदम पर चलते हुए अनिल कुमार ने भी साइनबोर्ड मुख्य रूप से उर्दू में थे लेकिन अनिल कुमार को उर्दू नही आती थी उन्होंने एक शख्स से इस बात का आग्रह किया कि वो साइनबोर्ड की भाषा कागज पर लिख दी। जिसे उन्होंने ध्यान से कॉपी भी किया।

anil kumar chauhan calligrapher

उन्होंने धीरे धीरे भाषा सीखने में रुचि रखते हुए उर्दू भाषा भी सिख ली।बता दे कि अनिल ने व्याव’सायिक पेंटिंग डि’प्लोमा भी किया हुआ है। कई साइन’बोर्ड पेंट करने के बाद 20 साल। प हले पुराने शहर की एक मा’स्जिद में पवित्र कु’रान की आयतों को चियरित करने का पहला काम दिया गया था।

उन्होंने पहली बार तैयब कलम को लिखा। अनिल कुमार बताते है कि मैं हरकत, जेर जबर, पेश की मदद से उर्दू के समान अ’क्षरों की पहचान करके अरबी भी पढ़ सकता हूं। बता दे कि अनिल कुमार ने अब तक 200से अधिक म’स्जि’दों में भी कम किया है।

anil kumar chauhan calligrapher

उनका दावा है कि उन्होंने कम से कम सौ म’स्जिदों में कोई पैसे भी न’ही मां’गे है। इसके अलावा भी अनिल कुमार ने कलीम तैयब, सूरह यासीन, खुल्फ राशिदीन, आयतल’कुर्सी और कु’रान शरी’फ की कई आय’तों भी लिखी ह।

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