Ansar Ahmad Shaikh IAS: ऑटो रिक्शा चालक का बेटा अंसार बना IAS अधिकारी

Ansar Ahmad Shaikh IAS :- मुफलिसी की मात देकर जिंदगी में सफलता पाने वालों को ऐसे तो कोई कमी नही है। आज हम आपको जिस शख्सियत के बारे में आपको बता रहा है। उसने गरीबी से लड़ते हुए आईएएस अफसर जैसा ऊँचा मुकाम भी हासिल किया है।

महाराष्ट्र के जालना जिले के एक छोटे से गांव में जन्म लेने वाले Ansar Ahmad Shaikh IAS ने 21 साल की उम्र में यूपीएसस्सी की परीक्षा में 371व रैंक हासिल की थी। लेकिन इस सफलता के पीछे उनके संघ’र्ष की कहानी है,जो बहुत ही कम लोग जानते है।

बता दे, Ansar Ahmad Shaikh के पिता ऑटो रिक्शा को चलाते थे। उनके घर की आ’र्थिक स्थिति बेहद ही गरीब थी। घर मे माता पिता के अलावा अंसार की दो बहनें ओर भाई भी है। ansar ahmad shaikh wikipedia

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अंसार के बड़े भाई कम उम्र में ही गेराज म काम करने के लिए मजबूर हो गए थे ताकि घर की मदद कर सके। अंसार अहमद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब वो चौथी कक्षा में थे तो उनके पिता ने पढ़ाई के लिए भी मना कर दिया था। जब टीचर के कहने पर अंसार को पढ़ाई को नही छु’ड़ाया था।

ansar ahmad ias बचपन से ही पढ़ने लिखने में आगे रहते थे। 10 वी में अच्छी मार्क्स लाने के अलावा उन्होंने 12 में 91 फीसदी मार्क्स लेकर सबको चौका दिया था

(ansar shaikh 12th marksheet)। पढ़ाई के दौरान ही ansar ahmad shaikh को किसी ने यूपीएससी परीक्षा UPSC के बारे में बताया था। उसी वक्त उन्होंने इस बारे में सोच लिया था कि वो इस परीक्षा को क्रेक जरूर करेंगे। ansar ahmad shaikh ias

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यूपीएससी UPSC Ansar Ahmad Shaikh IAS की परीक्षा में पैसे जुटाने के लिए उन्होंने वेटर का कामभी किया। वो होटल में सुबह 8 बजे से ही काम मे जुट जाते थे। रात तक काम भी करते थे। कभी भी वो अपने पढ़ाई को नही भूले ।

आज तक हमने बहुत से आईएएस अधिकरी के संघर्ष और सफ़लता की कहानी सुनी होगी। आज जिस शख्शियत से हम आपको मिलाने भी जा रहे है, उसकी कहानी सुनकर आप दांतो तले उंगली भी दबाग लेंगे।

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अंसार को कहानी जानकर आपको मानो लगता है कि क्या हकीकत है? क्या वाकई में कोई हकीकत फ़िल्म की स्क्रिप्ट सुनाई भी जा रही है। अंसार के पिता अहमद शेख ऑटो रिक्शा भी चलाते थे और घर में माँ बाप के अलावा दो बहनें और एक भाई थे।

पिता की कमाई से खर्चा पूरा नही पड़ता थाइसलिए माँ अजमत शेख भी लेंड लेबर का काम भी करती है। खेतों में काम करके जो थोड़ा पैसा मिलता भी था। वो अंसए के लिए उपलब्ध भी कराती है।

अंसार के पिता को बात भी समझ नही पाई और वो पहुच गए। उन के पिता अंसार की पढ़ाई छुड़ाने के लिए स्कूल भी पहुँच गए।

असर के शिक्षक पुरोसत्तम पडूकलर का जिन्होंने उनके पिता को कहा है कि उसे पढ़ने में बहुत ही अच्छा भी लगता है। एक इंटरव्यू में वो बताये है कि अगर पुरुस्ततोतम सर नही होते तो आज वो भी ऑटो ही चला रहे होते।

अंसार ने फीस भरने के लिए भी पपैसे भी नही थे। एक होटल में उन्होंने वेटर का काम भी शुरू किया। अंसार ने फीस भरने के लिए तीन हजार रुपए पगार पर भी रखा गया था। सुबह 8 बजे से 11 तक कि नॉकरी में बीच मे दो घण्टे का ब्रेक भी मिकता था।

अंसार इसी ब्रेक में भी खाना भी खते थे। कम्प्यूटर क्लास अटेंड करना भी जाते थे। साल 2015 में उन्होंने पहले ही प्रयास में उन्होंने 361 वी रेंक को हासिल भी किया है।

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