असदुद्दीन ओवैसी ने छोटी सी पार्टी को देशभर में कैसे दिलाई पहचान , जानिए

हैदराबाद के सांसद बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी अपने तीखे बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते है । इन दिनों वो एक बार फिर पश्चिम बंगाल को दिए एक तीखे बयान की वजह से सुर्खियों में है । ओवैसी कहते है जिसको देखों मुझे की टारगेट कर रहा है , ओवैसी ने कहा कि अगर किसी के घर मे भैंस दूध न दे तो ओवैसी जिम्मेदार, मुर्गी अंडा न दे तो ओवैसी जिम्मेदार है । बता दे, पिछले दिनों पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कूच विहार में बयान दिया।

उन्होंने अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यक्रम में कहा था कि हेदराबाद की एक राजनीतिक पार्टी है जो बीजेपी से पैसे ले रही । चूंकि असद उद्दीन की पार्टी आल इंडिया मजलिस इत्तेहाद उल मुस्लिमीन मूलतः हैदराबाद की ही तो ममता का निशाना उन्ही पर समझा गया । ओवैसी ने बिना देर किए ममता बनर्जी पर तीखा ह’मला बोला, उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की जुबान पर मेरा नाम इसके लिए मैं उनको धन्यवाद कहना चाहता हूँ ।

ओवैसी ने आगे कहा कि हर कोई मुझे जिम्मेदार क्यों ठहरा रहा है । ये राजनीतिक पार्टीयां क्यो नही मान लेती है कि अब मुसलमान बदल चुका है । ओवैसी ने ममता पर पलटवार करते हुए कहा कि पश्चिम में ममता बनर्जी बीजेपी को क्यो नहीँ रोक पाई क्या इसके जिम्मेदार भी हम है । बता दे, ममता बनर्जी के बयान के बाद हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन औवैसी ने पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ने की घोषणा की ।

ओवैसी ने कहा कि वह बंगाल में 2021 में विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेंगे । बता दे, ममता बनर्जी और असदुद्दीन ओवैसी की ये तीखी बहस पश्चिम बंगाल में नया इतिहास लिख सकती है । ये कारण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ममता बनर्जी अब तक केवल लेफ्ट और बीजेपी पर ही हमला बोलती रही है । लेकिन उन्होंने दूसरी पार्टीयों पर अब तक हमला नही बोला था ।

ममता बनर्जी के बयान से लगने लगा है कि अब उन्हें भी ओवैसी के बंगाल में आने से वोट कटने के डर लगने लगा है । बता दे, ओवैसी इससे पहले महाराष्ट्र और बिहार में पार्टी ने विधायक जीतकर आए थे । बता दे, आल इंडिया मजलिस इत्तेहाद उल मुस्लिमीन पार्टी पिछले 7-8 सालों से हैदराबाद के अलावा दूसरे राज्यो में भी पैर पसार रही है । ओवैसी जिस भी राज्य में जा रहे है वो वहां अपना असर जरूर छोड़ रहे है और उनका कई राज्यों में प्रभाव भी बड़ा है ।

ओवैसी युथ के बीच काफी लोकप्रिय है ,यही कारण हो सकता है ममता बनर्जी उन्हें हल्के में नही लेना चाहती है । आपको बता दे, असदुद्दीन ओवैसी की रैलियों में युवाओं की जमकर भीड़ उमड़ रही है । उनके प्रशंसकों की तादाद जितनी दिखाई देती है उसी तरह उनके आलोचक भी भरपूर दिखाई देते है । असदुद्दीन द्वारा रैलियों में दिए जाने वाले भाषणों के अलावा टीवी डिबेट से लेकर संसद में उनकी स्पीच को सोशल मीडिया पर लोग जमकर शेयर करते है ।

फेसबुक पर उनके लाखों की संख्या में पेज है जिस पर भी सिर्फ ओवैसी ही छाए रहते है । ओवैसी के समर्थक उन्हें एक बेहतरीन ठंग और तार्किक जवाब देना बताता है तो वही उनके आलोचक उन्हें बीजेपी का एजेंट या भड़काऊ भाषण देने वाला कहते है ।आपको बता दे, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस इत्तेहाद उल मुस्लिमीन बिहार और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेंगी ।

asadowaisi

बिहार विधानसभा उपचुनाव में आल इंडिया मजलिस इत्तेहाद उल मुस्लिमीन पार्टी ने जीत हासिल की थी इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि ओवैसी दूसरे राज्यों में भी अपना जनाधार बढ़ा सकते है । बता दे, हैदराबाद में आल इंडिया मजलिस इत्तेहाद उल मुस्लिमीन पार्टी के 7 विधायक और 1 सांसद है , जबकि महाराष्ट्र में आईआईएम पार्टी के 2 विधायक और 1 सांसद है । इसके अलावा आल इंडिया मजलिस इत्तेहाद उल मुस्लिमीन पार्टी ने बिहार विधानसभा में भी खाता खोला था ।

Leave a Comment

close