अज़ीम प्रेमजी गरीबों, मज़लूमों की नहीं करते मदद तो भारत के सबसे बड़े रईस होेते, जानिए

इंडियन बिजनेस टायकून और पदम् भूषण से सम्मानित अजीम प्रेमजी को आज किसी भी परिचय की जरूरत नही है। ये विप्रो लिमिटेड के अध्यक्ष है। इन्हें भारतीय आईटी उद्योग के बादशाह के तौर पर जाना जाता है। 24 जुलाई को अजीम प्रेमजी 75 वर्ष के हो गए है। 24 जुलाई 1945 को मुम्बई में जन्मे हुआ था। इनका पूरा नाम अजीम हाशिम प्रेमजी है।

अजीम प्रेमजी काफी दिनों से सोशल मीडिया पर सुर्खिया बटोर रहे है। कोरोना महामारी की शुरुआत हुई तब प्रधानमंत्री मोदी ने PM केयर्स फंड की शुरुआत की। उस समय अजीम प्रेमजी के विप्रो समूह ने 1125 करोड़ रुपए का दान किया था और खर्च करने का एलान किया था। हालांकि ये दान पूरी तरह पीएम केयर्स फंड के लिए नही था।

 azim premji news

बता दे कि ये पैसा उन्होंने अपने नाम शुरू किए गए अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की तरफ से खर्च करने की बात कही थी। बता दे कि जानकारों का कहना है कि अजीम प्रेमजी ने फाउंडेशन में अपनी कुल सम्पत्ति का 75 फीसदी दान नही किया होता तो वो आज भारत के दूसरे सबसे अमीर शख्स होते।फोब्र्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 के मुकाबले भारतीय अरबपतियों की कुल सम्पत्ति 23 फीसदी में गिरावट आई थी।

उनकी कुल सम्पति 406अरब डॉलर से हटकर 313अरब डॉलर ही पहुँच गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में प्रेमजी ने 22.6 अरब डॉलर की कुल सम्पत्ति में 75 फीसदी का दान किया था। जिसके बाद उनकी सम्प्पति 6.1 अरब डॉलर रह गई है।1966 में अजीम प्रेमजी अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रज थे। 21 साल की उम्र में उन्हें अचानक भारत लौटने पड़ा क्योंकि उनके पिता का निधन हो गया था।

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30 साल के होने के बाद उन्होंने बेचकर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की।1977 में उन्होंने अपने पिता के बिजनेस का नाम विप्रो रखा दिया। आज ये भारत की चौथी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। जिसका मार्केट केप करीब 8.4 अरब डॉलर है।

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