हि’न्दू पड़ोसी के अं’तिम सं’स्कार के लिए आगे आए मु’सलमान, मृ’तक के भाई बोले न’हीं भूलुंगा अहसान

एक तरफ जहां देश ही नही दुनिया क्रो’ना से लड़ने के लिए अपने मेडि’कल यौद्धा’ओं और स्वा’स्थ्य’कर्मियों के साथ मिलकर ज’नता की सेवा कर रहे है वो वाकई काबि’लेतारीफ है । लेकिन दूसरी और एक और मामला चल रहा है जिसको देखकर देश के किसी भी अमनपसंद का दिल दुखना तय है । ऐसे समय मे जब देश मे हि’न्दू मु’स्लिम किया जा रहा है। ऐसे समय मे भी कई कौ’मी एकता की मिसाल दे’खने को मिल रही है।

बीते दिनों ही एक मु’स्लिम स’ब्जी विक्रेता को पीटा गया है और कहा गया है कि जब तक को’रो’ना महा’मारी ख’त्म’ नही हो जाती है जब तक हि’न्दू ब’हुल इलाके में प्रवेश मत करना। बंगाल के बीर’भूम जिले में मु’स्लि’मो द्वारा अपने ”हि’न्दू पड़ो’सियों की मदद के लिए आगे आने की ख’बर साम’ने आ रही है। सिरी’शहर के निवासी श्यामशिस चटर्जी का 9 अप्रैल को बीर’भूम में नि’ध’न हो गया था, उनके भाई शि’बाशिष च’टर्जी का इस बात से बहुत चिं’ति’त थे कि देश मे लोक डा’उन है कैसे अं’तिम सं’स्कार करे?

मिडिय से बात करते हुए चटर्जी ने बताया कि लो’क डाउ’न की वजह से मेरे भाई के अंति’म संस्का’र के लिए मेरे रिश्तेदारों ने अपनी सक्ष’मता नही दिखाई। मैंने अपने भाई का अं’तिम संस्का’र के लिए मेरे पड़ोसी मु’स्लिम पड़ोसी से सम्पर्क किया। वो अपने बेटे और कुछ अन्य पुरुषों के साथ इस समा’रोह में मदद करने के लिए आगे आए।

काजी अबू बाद’शाह ने कहा कि हम पड़ो’सी है एक ही जमीन पर रहते है। मैं कैसे म’ना कर सकता था। मैं कैसे उस इं’सान का अंतिम संस्का’र के लिए म’ना करता हो मेरे सालो से दोस्त थे। काजी अबू बादशाह ने कहा है कि वो मेरा दोस्त था ,वह गुर्दे की सम’स्या से पी’ड़ित था और उसका इ’लाज चल रहा था।

मृ’तक के भाई ने कहा किमैं हमेशा मुस्लि’म भा’इयो का आभारी रहूंगा। यह घट’ना दिखाती है कि इंसा’नियत अभी जिंदा है। चटर्जी ने कहा कि का’जी अबू और उनके बेटे जब भी मिलते थे वो उनके ‘भाई के बारे में पूछते थे। ऐसे बहुत मामले सामने आए है मुस्लि’म समु’दाय के लोग इंदौर, जयपुर और मुम्बई में भी अपने हि’न्दू पड़ो’सियों के अंति’म संस्का’र में आगे आए है।

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