इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया डॉक्टर कफील को तुरंत रिहाई का आदेश,कफील का परिवार बोला- फैसले से खुश, अदालत को कहा शुक्रिया

इलाहा’बाद हाइको’र्ट ने डॉक्टर कफील पर बड़ी राहत देते हुए उनके खिला’फ लगे एनएसए के आरो’पो को खारि’ज कर दिया गया है। कोर्ट ने कफील को तुरं’त रि’हा करने का आदेश जारी किया है । बता दे, 29 जनवरी 2020 से ही उत्तरप्रदेश के मथुरा जेल में डॉक्टर कफील ब’न्द है। 10 दिसम्बर 2019 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में उन पर भ’ड़का’ऊ भा’षण देने का आ’रो’प था।

यह भाष’ण उन्होंने एंटी सीएए के वि’रो’ध प्र’दर्शन के दौरान दिया था । आपको बता दे, इला’हाबाद हा’इकोर्ट ने डॉक्टर कफी’ल की माँ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उन्हें तुरं’त रि’हा किया जाना चाहिए । डॉक्टर कफील की रिहा’ई की खबर सुनकर उनके परिवार वाले बेहद खुश है । जनसत्ता की रिपोर्ट्स के अनुसार डॉक्टर कफी’ल के भाई आ’दिल ने कहा कि मैं हा’इ’कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हु और अदा’ल’त का भी शुक्रि’या अदा करता हु ।

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उन्होंने कहा कि ये फैसला इति’हास में एक उदाहरण है । बता दे, यूपी सरकार ने अगस्त माह में ही डॉक्टर कफी’ल की हिरास’त को तीन माह और ब’ढ़ा दिया था । अलीगढ़ मुस्लि’म यूनि’वर्सिटी में डॉक्टर कफी’ल द्वारा दिए गए भा’ष’ण के मा’म’ले में 10 फरवरी के बाद ही रि’हा’ई की तैयारी थी लेकिन उन पर उससे पहले ही रा’ष्ट्री’य सु’र’क्षा का’नू’न के तहत मा’म’ला द’र्ज कर लिया गया था ।

CAA के वि’रो’ध में डॉ’क्टर कफी’ल के भाष’ण को सर’का’र ने भ’ड़’का’ऊ मान लिया था । लेकिन अदाल’त ने डॉक्टर कफील की सुनवाई के दौरान कहा कि कफी’ल का भा’ष’ण न’फ’र’त बढ़ा’ने वाला नही है और न ही भा’ष’ण हिं’सा वाला है । अदालत ने कहा कि कफील का भाष’ण नागरिकों के बीच एकता बढ़ाने वाला और रा’ष्ट्रीय अ’खंडता को बढ़ाने वाला है ।

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डॉक्टर कफील की तरफ से NSA के तहत माम’ला द’र्ज के खि’लाफ सु’प्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गईं थी । 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि डॉक्टर कफी’ल की हाइकोर्ट में पेंडिंग पड़ी याचिका की सुनवाई 15 दिनों के भीतर की जाए।

डॉक्टर कफील उस समय सुर्ख़ियो में आए थे जब 2017 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में ऑक्सीजन की कथित कमी और इंसेफेला’इटिस से 60 से ज्यादा बच्चों की मौ’त हो गई थी । इस घटना के बाद निजी प्रैक्टि’स चला’ने और अपने कर्तव्यों का सही से पालन नही करने के कारण उन्हें निलंबि’त कर दिया गया था। सितंबर 2017 में गि’रफ्ता’री के बाद उन्हें अप्रैल 2018 में जमा’न’त मिल गई थी।

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