मिलिए डॉ ख्वाजा अब्दुल हमीद से जिन्होंने भारत में बनाई पहली दवा कंपनी ‘सिप्ला’ और बचाई लाखों लोगों की जिंदगी

कहते है जब जब देश को जरूरत पड़ी तब तब सिप्ला कंपनी देश के लिए और यहां रहने वाले वाले करोड़ो लोगों के लिए एक व’रदान बनकर आई । सिप्ला के संस्थापक ख्वाजा हमीद की कहानी जब सिपला ने जे’ने’रिक दवा’ओं का उत्पादन शुरू किया तो अमेरिका ने उस पर पेटेंट कानून का उल्लंघन का आरोप लगाया था। उस वक्त इंदिरा गांधी मज’बूती से सि’पला केसाथ खड़ी हुई थी।आज अमेरिका अब भारत से हैड्रो’क्लो’सिक’लोकु’ईन की मांग कर रहा है।

नेश’नल हे’राल्ड में प्रकाशित सुजा’ता आ’न्दन की रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद हम आपको बताने जा रहे है।बात वर्ष 1920 की है। एक अमीर आदमी ने अपने बेटे को बै’रिस्टरी की पढ़ाई करने के लिए बम्बई से यूना’इटेड किं’गडम की ओर जाने वाले जहाज में बैठा कर विदा कर दिया। उस वक्त बड़े बड़े लोगो में ये रिवाज था। लेकिन लड़के का दिल का’नून की पढ़ाई में नही बल्कि रा’सायनिक वि’ज्ञान में था। जिसमे उन दिनों इस विषय मे कोई भ’विष्य नही माना जाता था।

लड़के के पिता ने कोई विकल्प नही छोड़ा था। जहा’ज ने जब बं’दरगाह से लंगर छोड़ा उस वक्त डेक पर खड़े होकर पिता को विदाई में हाथ हिलाते हुए अब्दुल हमीद के मन में दूसरी ही बातें चल रही थी। वो बीच रास्ते मे ही ज’र्मनी के तट पर उतर गए, जो उस वक्त रा’साय’निक वि’ज्ञान के क्षेत्र में सबसे अग्रणी देश माना जाता था । उन्होंने वहां से डि’ग्री हासील की । एक जर्मन यहूदी कम्यु’निस्ट लड़’की से शादी कर ली ।

इससे पहले की ए’डोल्फ हि’टलर के गे’स्टापो उन्हें पकड़ पाते वो दोनो ही जर्मनी से निकल कर भा’रत सुर’क्षित आ गए।रसायनो की व्यापक समझ के साथ ख्वाजा हमीद ने साल 1935 में केमि’कल, इंड’स्ट्रिय’ल एंड फार्मास्यु’टिकल लेबोरि’ट्रीज की स्थापना की। आजादी के कुछ दशकों के बाद इसी को Cipla के नाम से जाना जाता है।ख्वजा हमीद महात्मा गांधी और पं’डित जवाहर लाल नेह’रू के बड़े प्रशं’सक थे।

राष्ट्र’वाद के पक्के जज्बे के साथ उन्होंने जनसा’मान्य के लिए जेनरिक दवा’ओं का उत्पादन शुरू किया और क’म दा’मों में बेच’ना शुरू कर दिया। इनमे सिर्फ मले’रिया और तपेदि’क की द’वाई ही नही बल्कि अन्य श्वस’न की दवाई, ह्दय रोग, मधुमेह और गठिया जैसी रोज’मर्रा की छोटी बड़ी सभी बी’मा’रियों की दवा’इयां शामिल थी।आज भी इस’की मार्केट में बड़ी डिमांड है। cipla की कई द’वाइया बा’जारों में उप’लब्ध है।

बता दे, पूरी दुनिया को’रो’ना महा’मा’री से लड़ने के लिए लड़ रही है , इसमें किसी भी देश के लिए सबसे अह’म होता है उस बीमारी से लड़ने के लिए कि’ट बनाना , वैक्सी’न बनाना और फिर उसे दवाई के रूप में तब्दील करना ।देश को जब जब भी ज’रूरत पड़ी सिप्ला कंपनी देशवा’सियों के साथ कं’धे से कं’धा मिला’कर खड़ी नजर आई । आज भी जब देश को’रो’ना से ल’ड़ रहा है तब सिप्ला ही वो कंपनी है जिन्होंने सबसे पहले कहा कि वो इस बीमारी से लड़’ने के लिए सबसे कम दा’मों पर कि’ट बनाकर देगी ।

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