फ़वाद मिर्ज़ा ने घुड़सवारी में बनाया ये महान रिकॉर्ड, भारत को पदक दिलाकर ख़त्म किया ओलम्पिक का ….

हर कोई व्यक्ति अपनी जिंदगी में कुछ हासिल करने की चाह रखता है। बहुत से लोग होते है जिनके सपने पूरे हो जाया करते है। हम आपको बताने जा रहे एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जिसने 2 दशक बाद भारत का नाम रोशन किया है। भारत के सुपरस्टार कहे जाने वाले फवाद मिर्ज़ा ने इतिहास रच दिया है। उन्होंने घुड़सवारी में भारत का 2 दशक का सूखा खत्म करते हुए ओलंपिक कोटा हासिल किया है।

फवाद इस महीने यूरोपीय स्तर खत्म होने के बाद दक्षिण पूर्व एशिया, ओसियना ग्रुप जी के व्यक्तिगत स्पर्धा में शीर्ष रैंकिंग के घुड़सवार है। इसका अन्तराष्ट्रीय महासंघ 20 फरवरी को होगा। फवाद ने पिछले साल एशियन गेम्स में भारत को 36 साल बाद इक्वेस्ट्रीयन में मेडल दिलवाया था। बता दे, फवाद मिर्चा ने पिछले 36 वर्षो से व्यक्तिगत मेडल पाने वाला पहला भारतीय बनने का गौरव हासिल किया था।

अब पूरे देश की उम्मीद उनसे टोक्यो ओलंपिक के लिए हो गई है। अपने परिवार की घुड़सवारी की परंपरा को आगे बड़ा रहे फवाद 7 वी पीढ़ी के मेंबर में से आते है। उन्होंने यह सफलता इवेंटिंग इंडिविजुअल इवेंट में हासिल की थी। पिछले महीने ही पोलैंड के स्ट्रेजगोम में हुए ओलंपिक क्वालीफाई इवेंट में पहला स्थान हासिल किया था। आपको बता दे कि 27 साल के फवाद ने 6 क्वालिफाइंग स्पर्धा से कुल 64 अंक हासिल किए।

उन्होंने अपने पहले घोड़े से 34 और दूसरे घोड़े से 30 अंक बनाए है। फवाद को चीन और थाईलैंड की टीमो के क्वालीफाई करने का इंतजार करना पड़ा है। दोनो टीमें पिछले इटली में क्वालीफाई कर लिया। भारतीय घुड़सवार को कोटा नही मिल पाता।आप को बता दे, एशियाई खेलों की घुड़सवारी प्रतियोगिता में 1982 के बाद भारत के लिए फवाद मिर्ज़ा ने कोई मैडल अपने नाम किया है।

वह जकार्ता में भारत के घुड़सवारी में पदक लेने वाले व्यक्तिगत पहले व्यक्ति बनें है। इस के साथ ही उन्होंने भारत को रजत पदक दिलाने में भी महत्वपूर्व भूमिका निभाई है। बता दे, फवाद की नज़रे अब पूरी तरफ टोक्यो ओलम्पिक पर है। लेकिन उनके लिए ये बुरी खबर भी है कि उन्हें उनके पसंदीदा घोड़े सेगनूर मेडिकोट की पुरे साल सेवाए नहीं मिल पायेगी।

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