गुलाम मोहम्मद : 50 साल से किसी से नहीं हारे गामा पहलवान, उनकी ताकत की सिर्फ मिसालें दी जाती है उन जैसा कोई नहीं …

रुस्तमे हिन्द के नाम से जाने वाले गामा पह’लवान बहुत ही ज्यादा ता’कत’वर भी थे। वो एक दिनमे 5हजार बैठक और एक हजार सेज्यादा पुशअप भी लगा लेते थे। वह दुनिया के किसी भी पहल’वान से नही हारे ह। इनके बचपन का नाम गुलाम मोहम्मद gama pehalwan था। इन्होंने महज 10साल की उम्र में पह’लवा’नी को शुरू करदिया था।

गामा gama pehalwan की गरी’बी -बता दे कि ग’म पह’लवा’न की जवा’नी कु’श्ती लड़’ने में गुज’री है वही बुढ़ापे मे वो ग’री’बी से ल’ड़ते रहे। कुश्ती का यह महान खि’लाड़ी किसी और के रहम ओ करम पर पलने के लिए भी मजबूर था। उनके लिए हिंदु’स्तान के एक कुश्ती प्रेमी घन’श्याम दास बिड़ला 300रुपए महीने की पेंशन दिया करते थे।

gama pehalwan

इतना ही नही बड़ोदा के राजा भी उनकी मदद किया करते थे। मई 1960 में लाहौर में उनकी मृ’त्यु हो गई थी।उनके जाने के बाद गामा की बस दी गई ह, कोई गा’मा जैसा नही बन पाया है। विश्व विजेता गामा पहलवान साल 1910 में लन्दन में चैपिंयस ऑफ चैम्पियन्स नाम से कुश्ती की प्रतियोगिता भी आयोजित

की गई थी। उस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए गामा पहलवान अपने भाई के साथ गए हुए थे। उन दिनों पोलेंड के स्तानीलसलोस जबशियको विश्व विजेता पहलवान हुआ करते थे।क’म क’द की वजह से उन्हें हिस्सा लेने से भी म’ना कर दिया इसके बाद गामा ने भी

gama pehalwan

सभी नामी पहल’वानो को खुला चेलेंज किया। इसके बाद उन्होंने सभी पहल’वानो को चि’त भी करदिया। कौन था गामा पहलवान gama pehalwan – 22 मई सन 1878 में अमृतसर में गुलाम मोहम्मद का जन्म हुआ । करीबी लोग उनको गा’मा कहकर बुलाते थे

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