ह’ज़रत उ’मर फा’रुख (र.अ.) का अ’द्ल और इं’साफ ,बा’दशाहों और आम मु’सलमानों के लिए है एक स’बक

ह’जरत उ’मर फा’रुख र’ज़िय’ल्लाहु अन्हु अपने सल्तनत के लोगो से प्यार करते थे। ह’ज़रत उ’मर पूरी दुनिया को ऐसी ऐसी मि’साल पेश करके गए कि आज के बा’दशाह उनके रत्ती भर कार्य को भी कर पाए तो बड़ी बात है। आज ह’ज़रत उ’मर द्वारा किए गए कार्य पर है’रान बिना नहीं रह पाएंगे। ऐसा बादशाह जिनके हर कार्य से मि’सालें निकलती हो , हर फैसले में इं’साफ न’जर आता हो। वो अपने मु’ल्क के लोगो से कहा करते थे कि मैं आपके लिए कोई भी गवर्नर इसलिए मु’कर्रर नही किया कि वो आपके ऊपर जु’ल्म करे।

बल्कि वो र’सूल अ’ल्लाह स’ल्लाहु अ’लैही व’सल्लम के बताए हुए रास्ते पर चले , इसलिए गवर्नर मुकर्रर किया है। जब शहर-है-म’दीना में कोई भी शख्स ह’ज के लिए आता तो ह’ज़रत उ’मर फा’रूक़ र’जिअ’ल्लाहु अन्हु उनसे मालूम करते थे कि किसी गवर्नर ने उनसे ज्या’दती तो नही की है ,किसी ने उनको बिला वज़ह स’ताया तो नहीं। एक बार एक गरीब लड़का ह’जरत उ’मर र’ज़ियल्लाहु अ’न्हा के पास आया।

उसने ह’ज़रत उ’मर से कहा कि में मि’स्र से आया हु। उस गरीब लड़के ने कहा कि गवर्नर के बेटे ने उसे मा’रा पी’टा है ,वो भी बिना वजह से। हज़रत उ’मर ने गरीब लड़के की दास्ता सुनकर उन्होंने गवर्नर और उसके बेटे से तलब किया। फिर उस गरीब बच्चे को बुलाया और ऐसा हु’क्म दिया सब हैरान थे। उन्होंने उस गवर्नर के बेटे को को’ड़े मा’रने का आदेश दिया। जितना उसने तुम्हारे मा’रा है।

फिर एक दो कोढ़ा उस ग’वर्नर को मा’रो लेकिन उसने उसके बे’टे को मा’र कर बदला पूरा किया। एक बार ह’जरत उ’मर फा’रुख र’ज़िय’ल्लाहु अन्हु रात को ग’श्त लगा रहे थे। तो एक घर से बच्चे की रो’ने की आ’वाज आई। उन्होंने झांक कर देखा तो वो औरत बच्चे को फुसलाने के लिए आग पर बर्तन चढ़ाई हुई है। बर्तन में पानी था और कुछ नही था। बच्चे भू’ख से रो रहे थे तो उ’मर र’ज़िय’ल्लाहु अ’न्हा ने फ़ौरन अपने पीढ़ पर अनाज घी, गो’श्त लादा और उसे बनाया।

उस औरत के घर लेके गए। जहाँ बच्चों ने भर पेठ खाना खाया और वापस लौट कर अपना ख’र्च मुकरर किया। एक ओर ऐसा ही वाक़्या है , जिसमें ह’ज़रत उ’मर र’जिअ’ल्लाहु अन्हु की स’ल्तनत की मिसाल मिलती है। एक बार वो कही से गुजर रहे थे उनकी नजर एक बुढ़िया पर पड़ी वो रो रही थी और उ’मर रज़ियल्लाहु अन्हा को बु’रा भला कह रही थी। तो उन्होंने फ़ौरन पूछा कि क्यो ऐसा क्या हुआ।

उस औरत ने कहा उमर के पास इतनी बड़ी बा’द’शा’हत और मुझे देने को कुछ नही। तो उमर रज़ियल्लाहु ने फरमाया की क्या किया जाए कि आप उमर फारुख रज़ियल्लाहु अन्हा को मा’फ कर दे। उस बूढ़ी औरत ने बताया कि मुझे 25 दीनार चाहिए। उन्होंने फ़ौरन 25 दीनार दे दिए। वापस लौटते ही खर्च मुकर्रर कर दिया। ह’ज़र’त उ’मर र’जि’अ’ल्लाहु अ’न्हु से आज के बा’दशा’हों को स’बक लेना चाहिए। एक बादशाह इं’साफ कैसे करता है , कैसे स’ल्तनत चलाता है , सब चीजें ह’ज़रत उ’मर र’जिअ’ल्लाहु अ’न्हु से सीखी जा सकती है।

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