इन 6 औ’रतों से एक वक़्त नि’का’ह करना ह’रा’म है तो दूसरे वक़्त नि’का’ह है ह’ला’ल , व’जह सु’नक’र है’रा’न ….

इ’स्ला’म में नि’का’ह करने को लेकर काफी अहमियत दी गई है । नि’का’ह यानी एक ऐसा ता’ल्लुक जो औ’रत और म’र्द के बीच पा’क दा’म’न होता है । नि’का’ह का पा’कदा’मन रि’श्ता म’र’ने के बाद भी पा’क रहता है । दरअसल नि’का’ह का मतलब ही मि’यां बी’वी के बीच मो’हब्बत को क़ा’यम करना है । ह’ज़र’त अ’ब्दु’ल्लाह बिन अ’ब्बा’स र’जी अ’ल्ला’हु अ’न्हु रि’वाय’त करते है कि नबी ऐ क’री’म स’ल्ला’हु अ’ले’ही व’स्स’लाम ने इ’रशाद फरमाया की आपस मे मु’हब्ब’त रखने के लिए नि’का’ह जैसी कोई दू’सरी ची’ज़ नही देखी गई ।

इसी ह’दी’स से पता चला कि औ’रत और म’र्द के बीच नि’काह ही दो खा’नदा’न को मि’लाता है , उनके बीच रि’श्ता का’यम करता है । इसके बहुत सा’रे फा’य’दे भी बताए गए है । इ’स्ला’म मे नि’का’ह कै’से क’र’ना चा’हिए , किससे नि’काह क’रना चाहिए और बाकी नि’का’ह करने के पूरा तरीका बताया हुआ है । अ’ल्ला’ह त’बा’र’क व त’आ’ला ने सभी मो’मि’न म’र्द और औ’र’तों पर नि’का’ह को फ़’र्ज़ किया है । इ’स्ला’म मे नि’काह करना यानी आ’धा ई’मा’न तक बताया गया है । अ’ल्ला’ह के न’बि’यों , व’ली यों से लेकर उसके ने’क बंदों ने नि’काह किया है ।

अ’ल्ला’ह ने इस तरह से हम पर नि’काह को ह’ला’ल क’रार दिया है । एक मो’मि’न म’र्द को किस औ’र’त से नि’का’ह करना चाहिए और एक औ’र’त को किस म’र्द से नि’का’ह करना चाहिए , इसके बारे में त’फ़’सी’ल से बताया गया है । लेकिन अ’ल्ला’ह त’बा’र’क व त’आ’ला ने कुछ औ’र’तों से नि’का’ह को ह’रा’म क’रा’र दिया है । आज हम आपको उसके बारे में त’फ़्सी’र से बताएंगे । ऐसी औ’र’तें भी है जिनका एक तरफ नि’का’ह ह’रा’म होता है तो दूसरी तरफ ह’ला’ल होता है ।

आइये जानते है इन सबके बारे में , ऐसी कौ’नसी औ’र’तें है । सबसे पहले हम बात करते है इ’द्द’त में बैठने वाली औ’र’तों के बारे में । दरअसल जिन औ’र’तों के शौ’ह’र इ’न्ते’क़ा’ल कर गए हो तो ऐसी औ’र’तों पर तब तक नि’का’ह ह’रा’म में जब तक इन औ’र’तों के इ’द्द’त के दिन मु’क’म्म’ल नहीं हो जाते है । इ’स्ला’म में ऐसी बातों को बड़ी ही अच्छी तरह से समझाया है । बता दे , ऐसा इसली;ये किया जाता है क्योंकि या तो इ’द्द’त में बैठने वाली औ’र’त या तो हा’म’ला हो सकती है ।

या फिर ऐसी औ’र’त के ब’च्चों पर ग’ल’त अ’स’र पड़ने का अं’दे’शा हो ऐसा करने से इसलिए रो’का गया है । इसलिए ही इन औ’र’तों पर नि’का’ह को ह’रा’म किया गया है । अब हम बात करते है जि’ना की हुई औ’र’तों के बारे में । इस प्रकार की औ’र’तों से भी मो’मिन म’र्द को नि’का’ह नहीं करने की इ’जा’ज’त दी है । जि’ना की हुई औ’र’त से मो’मि’न म’र्द शा’दी न’ही कर सकता है । जि’ना करने वाली औ’र’त से सिर्फ जि’ना किया हुआ म’र्द नि’का’ह कर सकता है ।

अ’ल्ला’ह त’आ’ला ने ऐसी औ’र’तों पर भी नि’का’ह को ह’रा’म करार दिया है । लेकिन अगर औ’र’त तौ’बा कर ले तो फिर वह औ’र’त नि’का’ह कर सकती है । अब हम बात करते है उन औ’र’तों के बारे जिनका त’ला’क हो चुका हो । या तो शौ’ह”र ने अपनी बी’वी को त’ला’क दिया हो या बी’वी ने शौ’ह’र को किसी वजह से त’ला’क दिया हो यानी दोनों ही म’स’लों में अगर औ’र’त त’ला’क’शु’दा है तो औ’र’त को फौ’री तौ’र पर शा’दी क’र’ने की इ’जा’ज’त नही है ।

यह औ”र’त कुछ शर्त पूरी करने के बाद नि’का’ह कर सकती है । श’रि’ये तौ’र पर औ’र’त को चाहिए कि सबसे पहले किसी दू’स’रे म’र्द से शा’दी करें । वह दू’सरे म’र्द से शा’दी करने के बाद उससे त’ला’क ले । फिर औ’र’त इ’द्द’त के दिन पूरे करने के बाद पहले वाले औ’र’त से शा’दी करने की इ’जा’ज़’त है । श’रि’ये तौर पर यह बहुत ही म’ह’त्व’पू’र्ण म’स’ला है । त’ला’क जैसे म’स’लो को हल करने के लिए हमें त’माम सी’नि’य’र लोगों से इसकी म’द’द लेनी चाहिए ।

अ’ल्ला’ह के प्या’रे र’सू’ल स’ल्ला’हु अ’ले’ही व’स्स’ल’म ने इरशाद फरमाया कि नि’का’ह में तु’म को ल’ड़’के या ल’ड़’की की फू’फी से नि’का’ह न’ही करना चाहिए । क्योंकि इसमें इ’ख़्ते’ ला’फ़ है । अगर तुम उस ल’ड़’की को त’ला’क दे रहे’ हो तो फू’फी की ल’ड़’की से शा’दी करने की इ’जा’ज़’त न’ही दी है और इससे जा’य’ज क’रा’र न’हीं दिया गया है ।

अ’ल्ला’ह त;बा’र’क व त’आ’ला ने इरशाद फरमाया कि म’र्दो को एक वक्त में 4 औ’र’तों’ से ही नि’का’ह को जा’य’ज़ क’रा’र दिया गया है । इससे ज्या’दा औ’र’तों से शा’दी की इ’जा’ज़’त नहीं दी गई । कुछ शर्तों पर इसकी इज़ाज़त है , इन बातों का भी आपको जा’नकारी होना जरूरी है । एह राम वाली औ’र’तों से भी नि’का’ह की इ’जा’ज़’त न’ही दी गई है । अगर औ’र’त ऐ ह’रा’म खो’ल दी तो इसकी इ’ज़ा’ज़’त है ।

ह’ज़’र’त अ’बु हु’रै’रा रा’जि’अ’ल्ला’हु अ’न्हु फरमाते है कि न’बी के क’री’म स’ल्ला’हु अ’ले’ही व’स्स’ला’म ने इरशाद फरमाया कि ‘जो श’ख्स अपनी बी’वी से मे’ह’र का भु’ग’ता’न न’हीं क’र’ने के इ’रा’दे से शा’दी क’र’ता है वह जा’नी है और जो को’ई भी श’ख्स वा’प’स न लौ’टा”ने के इ’रादे से क’र्ज लेता है तो वह चो’र है । (अ’त त’र’ग़ी’ब व त’र’हि”ब 1807 )

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