भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी निशा वारसी की मां की आंखो में छलके आंसू, बोली- बस एक ही तमन्ना थी कि अल्लाह ..

भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो ओलंपिक में इतिहास बनाते बनाते भी रह गई है। ब्रॉन्ज मेडल के लिए मुकाबला कर रही भारतीय टीम को ब्रिटेन के हाथों 4-3 से हार का सामना भी करना पड़ा है। सोनीपत में निशा वारसी के परिजन टीवी पर टिकटिकी लगाए मैच को देखते भी रहे है। निशा बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक भी रखती है।

उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद ओलंपिक जाने वाली भारतीय हॉकी टीम की महिला में जगह भी बनाई है। निशा की माँ महरून भारत की जीत की दुआ भी करती रही है। उनकी बस एक ही तमन्ना थी कि अलग भारत देश को जीत दे दे।निशा सोनीपत के रामनगर इलाके की एक कॉलोनी के रहने वाली है।

indian hockey player nisha warsi

उनके पड़ोसी बताते है कि उनकी गांव की बेटी बेहद ही सीमित संसाधनों के बावजूद भी ओलंपिक तक पहुँची है। उनके पड़ोसी बताते है कि हार जीत तो लगी रहती है, खेल के दो पहलू होते ह। एक हार और एक जीत, हार जीत लगी रहती है।

उन्होने आगे बताया है कि निशा की टीम हार गई है, इसका कोई मतलब नही है। खुशी इस बात की है कि बेटी ने बेहद ही सीमित संसाधनों के बावजूद गरीबी से जूझते हुए देश का नाम भी रोशन किया है।निशा के पिता सोहराब अहमद दर्जी थे।

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उनके पिता को साल 2015 में उन्हें ल’क’वा हो गया था। उन्हें इसका भी काम छोड़ना भी पड़ा। वही निशा की माँ महरून ने फोम बनाने की एक कम्पनी में भी काम किया है। जिससे निशा एक हॉकी स्टार बन सके।

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