Indian Railways के इन पदों पर अब नहीं होगी भर्तीयाँ, अग्रेंजो के जमाने का नियम बदला, अब अधिकारियों को …

को’रो’ना वा’इ’र’स म’हा’मा’री के दौर में खर्चे घटाने के लिए भारतीय रेलवे ने एक ऐतिहासिक फैसला किया है। इसके तहत रेलवे ने अंग्रेजों के जमाने की डाक मैसेंजर सेवा को बंद करने का नि’र्णय लिया है। गो’प’नी’य दस्ता’वेजो को भेजने के लिए इस सेवाओ का इस्तेमाल होता था। इस बदलाव के बाद रेलवे के सी’नि’य’र अ’धि’का”रि’यों को प’रे’शा’नी हो सकती है ।

दरअसल, रेलवे के सी’नि’यर अधि’का’रियों के आवास पर काम करने वाले बंगला पियून और टेलीफोन अटेंडेंट सह डाक खलासी के पद पर अब कोई नई भर्ती नही की जाएगी।इसकी भर्ती की कोई परीक्षा नही होती है। रेलवे अधिकारी जिसे चाहे भर्ती कर सकता है। रेलवे बोर्ड ने आदेश में कहा है की यह फैसला किया गया है कि टीएडफी के स्थानापन्न के तौर पर नए लोगो की नियुक्ति की प्रकिर्या आगे नही बढाई जानी चाहिए।

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इसके अलावा भी कहा गया है कि न ही तत्काल नि’युक्ति की जानी चाहिए। रेलवे बोर्ड के आदेश में ये भी कहा गया है कि इसका सभी रेल प्रतिष्ठानों में सख्ती से पालन किया जाए। रेलवे बोर्ड का कहना है कि इस निर्देसग का पालन सुनिश्चित होना चाहिए क्योंकि इससे भत्तों, स्टेशनरी, फैक्स आदि पर होने वाले खर्च की बचत होगी।

अंग्रेजों ने इस व्यवस्था उस दौर में शुरू की थी जब इंट’रनेट और ई’मेल की सुविधा नही थी। इससे पहले भी खर्चे घटाने के लिए रेलवे ने कई कदम उठाए है। इसमें अब नए पदों पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही वर्कशॉप्स म कर्मचारियों की संख्या को सीमित की गई है। डिजिटल कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए कहा गया है। 1855 में भारत में रेल की शुरुआत हुई थी। फिर इसका लगातर विकास होता रहा।

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1920 के दशक के बाद से ही एकवर्थ कमेटी ने भरत में रेलवे के विस्तार के लिए अलग रेल बजट प्रस्तुत करने की सिफ़रिश की थी ताकि भारत की जरूरतों को देखते हुए रेलवे अपने विस्तार की योजना खुद ही बनाए और अपने लिए संसाधन भी जुटाए। 1924 में इस पर अमल शुरू हुआ तबसे यह परंपरा चली आ रही थी और अब इस पर अब ब्रेक लग गया है।

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