दर्जी थे पिता, मां ने फैक्ट्री में किया काम, ऐसे हॉकी स्टार बनी निशा वारसी, ओलंपिक में मचाया धमाल

ओलंपिक खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम इति’हास रच’ने से भी चूक गई लेकिन अभी मेडल का सपना बरकरार है। अर्जेंटीना के साथ खेले गए सेमीफाइनल मैच में भारत महिला हॉकी टीम भी हार गई है। अर्जेंटीना ने 2 गोल दागे है जबकि भारत सिर्फ एक ही गोल पार कर पाया है। भारत की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन भी किया है।

देश को उन हॉकी टीम की 16 बेटियों पर भी नाज है जिन्होंने इतिहास में पहलीं बार महिला हॉकी टीम को अंतिम-4 तक पहुचाया है। आइये इन्ही में से एक मु’स्लि’म परिवार की निशा वारसी के बारे में भी जानते है। भारत की महिला हॉकी टीम भी सेमीफाइनल से आगे नही बढ़ पाई है। उन्हें अर्जेंटीना के साथ 1-2 से हा’र मिली है।

indian women hockey team nisha warsi

टीम इंडिया अब कांस्य पदक के लिए भी खेलेगी। महिला टीम से पहले पुरुष टीम भी सेमीफाइनल का मैच हा’र गई थी। उसे बेल्जियम ने शिकस्त दी थी।हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले निशा वारसी ने पहली बार ही ओलम्पिक खेलो में हिस्सा लिया है। निशा को काफी ज्यादा मु’श्कि’लों का सा’मना भी करना पड़ा है।

उनके पिता दर्जी है लेकिन साल 2015 में उनके पिता को ल’कवा हो गया था। उनकी माँ महरून एक फोम बनाने वाली कम्पनी में काम करती है। ताकि निशा एक हॉकी स्टार भी बन सके। निशा ने अपना अंतराष्ट्रीय डेब्यू साल 2019 में हिरोशिमा के FIH फाइनल्स में किया था।

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तब से वो भारत का 9 बार प्रतिनिधित्व भी कर चुकी है। आज निशा टोक्यो ओलंपिक में नाम भी रोशन कर रही है। साल 2018 में निशा को भारतीय टीम के केम्प के लिए भी चुना गया था।

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