एक ऐसा देश जहाँ मुस्लिम और ईसाई एक साथ करते है रोजा इफ्तार, और रमजान के महिने में …..

क़ा’हिरा एक शहर का नाम है। यह अफ्रीका महाद्वि’प के नील नदी के किनारे बसा एक सबसे बड़ा नगर है। मिस्र की राजधानी क़ाहिरा है। आज भी यह उधोयोग करण का केंद्र है।क़ाहिरा में मु’स्लि’म और ईसा’ई बड़ी तादात मे रहते है। मुस्लिम समुदाय के सबसे पवित्र महीना रमजान 25 अप्रैल से शुरू हो गया था।क़ा’हिरा में मु’स्लिम समुदाए की परम्पराओं को ईसाई बड़ी धूमधाम से मनाते है। रम’जान में इफ्तार के वक्त सभी लोग एक साथ रोजा खोलते है।

मिस्र की राजधानी के शोब्रा क्षेत्र में क़ाहिरा के गवर्नर के अनुसार लगभग 590,000 ई’साई निवास करते है।एक ईसा’ई या’स्मीन टाडर्स ने अरब न्यूज़ से बातचीत में बताया कि मैं रमजा’न के समय किसी के सामने खाना नही खाता हूं। मैंने कम उम्र में ही यह सब सीख लिया था इसके बारे में मुझे मेरे माता पिता ने बताया था। मैं 20 साल से अपने मु’स्लिम भा’इयो के रीति रिवाजों को मनाता हूं।शोबरा में हमारी गली में हम इफ्ता’र की तैयारी करते है और मुस्लिम और ईसाई मिलकर करते है।

इस साल को’रोना की वजह से हमारी सुरक्षा हमे सबसे अधिक सतर्क बना रही है।शोबरा स्ट्रीट पर एक फेमस किराने की दुकान के मालिक मैगी अजीज, सड़को पर रम’जान के दौरान दाव’तों में चावल और पास्ता दान करते है। इस साल कोरोना की वजह से उन्होंने जरूरतमन्द निवासियों को भोजन दान करने का फैसला किया है।दुकान मालिक अजीज ने अरब न्यूज़ को बताया कि मैं यह सबदि’ल से करता हूं, मैं करता हूं अच्छाई के लिए करता है जो मैं सभी लोगो के लिए चाहता हूं।

यही अ’ल्ला’ह से मोहब्बत है। उन्होंने आगे बताया कि मिस्र के लोग अच्छे काम करते थे ओर सभी त्योहारों पर एक दूसरे से जुड़े रहते थे सबसे ज्यादा रमजान के महीने में। उन्होंने आगे बताया कि मैं कभी कभी रमजान में सभी को आधी कीमतों पर चीजे भी बेचता हूं।मिस्र के कैथोलिक चर्च के प्रवक्ता फादर रफीक ग्रीश ने कहा कि रम’जा’न में रो’जा रखने वाले की इच्छाओं को ध्यान में रखते हुए हर साल कॉप्स को निर्देश दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि चर्च में रम’जान के महीने में सूर्यो’दय और’ सू’र्यास्त के बीच रम”जान के महीने में खाने और पीने की व्यवस्था पर जोर दिया।ग्रीश ने कहा कि रम’जान के दौरान चर्चो ने ग’रीब लोगो को खाद्य सा’मग्री समेत कई बुनि’यादी जरूरत सा’मग्री वित’रित की है।महमू’द अब्दे’ल जो 80 के दशक के है उन्होंने कहा कि कभी भी अपने जीवन मे रम’जा’न के दौरान मुस्लि’म और ईसा’ई लोगो की बीच लड़ाई नही देखी है। शोबरा इंडस्ट्रियल स्कूल के ये पूर्व शिक्षक है ।

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