ने’की का फ़ल :पहले टैक्सी ड्राइवर का उड़ा’या मज़ा’क फिर इस अरबपति ने बनाया उसे दा’मा’द, लं’दन का स’च्चा वा’क़्या पढ़िए

मौ’ला’ना ता’रि’क म’सूद एक ब’या’न करते हुए फ’र’मा’ते है कि एक श’ख्स ने अ’मी’र ल’ड़’की से शा’दी कर’नी चा’ही, वो उसके वा’लि’द के पा’स ग’या और नि’का’ह क’र’ने का पै’गा’म दिया। वो ल’ड़’का बहुत ग’री’ब था, ल’ड़की अ’मीर थी। उस ल’ड़’के ने बताया कि मैं का’म करता हूँ। ल’ड़’की के पि’ता ने कहा कि तुम क्या का’म क’रते हो। ल’ड़के ने ल’ड़’की के पिता से कहा कि मेरी एक छो’टी सी दु’का’न है , उसे च’ला’ता हूं और समय निकालकर टै’क्सी भी चलता हूं।और ह’ला’ल क;मा’ता हूँ।

मौ’ला’ना ने अपने ब’या’न में कहा कि ये एक स’च्चा वा’कि’या है। यह वा’क़्या लं’द’न में रहने वाले टे’क्सी ड्रा’इ’व’र के साथ पे’श आया है। मौ’ला’ना के अनुसार, टे’क्सी’ ड्रा’इ’व’र के नि’का’ह की पे’श’क’श पर ल’ड़’की के वा’लि’द ने उसका म’जा’क उ’ड़ा’या , उसे बु’रा भ’ला क’हा। उन्होंने कहा कि तु’म्हा’री मा’ली है’सि’य’त हमारे टॉ’य’ले’ट के बराबर है , तुम कु’छ भी न’हीं हो। ल’ड़’ की के वा’लि’द ने कहा कि मे’री बे’टी हमेशा से आ’रा’म से रही है, आप ख’र्च न’ही उ’ठा पा’ओ’गें।

उ’न्हों’ने कहा कि ये शा’दी न’ही हो स’क’ती और आप य’हां से वा’प’स च’ले जा’ओ। जब दो’नों की ये बाते हो रही थी तो ल’ड़’की एक क’म’रे में ये बाते सु’न र’ही थी । उस ल’ड़’के को देख भी लिया। उस ल’ड़’के को देखा तो ल’ड़’की के दि’ल मे उसके लिए प्या’र आ ग’या और वो मो’ह’ब्ब’त में गि’र’फ्ता’र हो गई। उ’ध’र लड़’की के वा’लिद ने ल’ड़’के को वापस लौ’टा दिया।

अब ल’ड़’की प’रे’शा’न र’ह’ने ल’गी, रा’तो में उस ल’ड़’के के बारे में ख्वा’ब देखने लगी। ज’ब ज्या’दा ही प’रे’शा’न र’ह’ने ल’गी तो उसने अपने वा’लि’द को सा’री बा’त ब’ता दी। मैं उ’स ल’ड़’के से नि’का’ह क’र’ना चाहती हूं ,जो ल’ड़’का पै’गा’म लेकर आया था। बे’टी की इस बात को सु’न’क’र बा’प पा’ग’ल हो गया। ल’ड़’की को ध’म’की देने लगा, कि में तेरे हा’थ और पै’र तो’ड़ दूँ’गा।

अ’प’नी बे’टी को प’रेशा’न क’र’ने ल’गा। बा’प क’ह’ने ल’गा कि मे’री ना’क क’ट जा’ए’गी ,लो’ग क्या क’हें’गे लेकिन बे’टी पर इ’स’का अ’स’र न हुआ। एक दिन बे’टी की शा’दी उसी ल’ड़’के से हुई उसके ब’ड़े ब’ड़े बच्चे है। इस वा’क़’ये से ह’में प’ता च’ला कि क’भी भी कि’सी को छो’टा न’हीं स’म’झ’ना चाहिए। इस दु’नि’या में सब कुछ अ’ल्ला’ह त’आ’ला की म’र्जी से ही होता है। यहां तक कि पे’ड़ का एक प’त्ता भी उ’स खु’दा के बगैर न’हीं हि’ल स’क’ता है। इ’स’लि’ए आ’प ब’ड़े या छो’टे स’भी के सा’थ प्या’र से पे’श आ’ए।

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