700 साल में पहली बार नहीं निकलेगा ताजियों का जुलूस, दिल्ली ईमामबाड़े के जिम्मेदार बोले- 1947 आजादी के समय भी ….

हर साल की तरह की इस साल भी मुस्लि’म समुदाय के लोगो का इस्लामिक साल शुरू हो गया है । इस इ’स्लामिक साल के महीने की 10 तारीख को मोहर्र’म का त्यौहार बनाया जाता है। मोहर्रम के महीने की 9 और 10 तरुख को रोजे रखे जाते है और ता’जिये निकाले जाते है। को’रो’ना की वजह से पूरे देश मे सभी त्योहारों पर रो’क लगा दी गई है।

देश की राजधानी दिल्ली में इस त्योहा’र को लेकर कई सालों से तैयारी होती है और दिल्ली में ताजि’ये निकालने का सिसलिला लगातार मुगलका’ल से ही पहले से भी चला आ रहा है। को’रो’ना की वजह से 700 साल में यह पहली बार होगा जब तजिये नही निकाले जाएंगे। इस बात को निजा’मुद्दीन औलि’या के दरगाह शरीफ के प्रमुख कासिफ नि’जामी ने इस बात को कहा है।

moharram 2020

निजामी ने ANI से बात करते हुए कहा है कि भारत पा’किस्ता’न के बंटवा’रे के वक्त भी ताजि’ये निकलने जाने पर भी रो’क नही लगाई गई थी लेकिन को’रो’ना की वजह से ऐसा अब होगा। दिल्ली और केंद्र सरकार ने धार्मि’क कार्य’क्रम की अनुमति को न’ही दिया है। मो’हर्रम के साथ ही जुलू’स को भी न’ही निका’ला जाएगा।

उन्होंने बताया है कि ,700 सालों से अधिक समय से द’रगाह से कुछ दूरी पर ही इ’मामबाड़ा में सबसे बड़ा फूलों ताजि’या रखा जाता है। इसके साथ ही 4 और ताजि’ये भी रखे जाते है। मोह’र्रम की 10 तारीख को यहां से जुलूस निकाला जाता है लेकिन कोरो’ना की वजह से इस साल कर्बला में सर्फ फूलों का ताजिया ही रखाजाएगा।

moharram 2020

बता दे कि दिल्ली के अलीगंज जोरबाग में शाए मरदान दरगाह और अंजुमन कर्बला कमेटी के सदस्य गोहर असगर कासमी ने बताया है कि हर साल मोहर्रम की पहली तारीख से ही मजलिसे शुरू हो जाती है। इसके अलावा ज्यादा जगहों पर भी ताजियों को रख दिए जाते है।10 तारीख को यहां पर 70 ताजियों का जुलूस निकाला जाता है। 12 तारीख को तीज का मातम का जुलूस निकाला जाता है ।

उस बार प्रशासन ने इसकी अनुमति नही दी है। बता दे कि दिल्ली के जोरबाग की कर्बला सबसे पुरानी कर्बला है। यहां पर तैमूर लंग के शासनकाल से ताजिये रखने का सिलसिला चला आ रहा है।

moharram 2020

हजरत निजामुद्दीन औलिया मि दरगाह से जुड़े मोहम्मद निजामी ने बताया है कि आसपास के कई हिन्दू परिवार भी कई वर्षों से जुलूस में शामिल होते है। वही महरौली का एक परिवार तो कई दशकों से ऐसा कर रहा है।

देश मे हर राज्यो में ताजिये निकाले जाते है । लेकिन कोरोना की वजह से ताजिये के कारोबार से जुड़े कई लोगो का नुकसान भी हुआ है। मोहर्रम के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग इमाम हुसैन की याद में मोह’र्रम मनाते है।

कुवैत, ओमन औऱ सऊदी अरब ने शिया मुस्लिमो को आशूरा के समारोह की अनुमति दे दी हैं जबकि बहरीन ने मस्जिदों और हुसैनियत में इसे मानने को लेकर अनुमति नही दी है।हर साल लाखों की तादात में इराक में लोग पहुचते है और इवादत करते है।

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