मिलिए मैसूर में बनी पहली मु’स्लिम मेयर से, 158 साल के इतिहास में हुआ ऐसा पहली बार, जानिए

विगत कुछ वर्षों से हमारे देश में जब भी मु’स्लिम म’हिलाओं की बात आती है तो तरह तरह की बातें होने लगती है। कहा जाता है कि मुस्लि’म समुदाय में महि’लाओं को आजादी नही दी जाती है उनको बंदिश में रखा जाता हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नही है । बता दे, बीते कुछ सालों में महि’लाओं ने रिकॉर्ड कामयाबी हासिल की है । वह अब लगातार आगे आ रही है । म’हिलाए समाज का ही नही बल्कि अपने देश का भी नाम रोशन कर रही है।

आज यह सब बातें साफ हो गई है कि हर राज्यो में मुस्लि’म परिवार की बेटियां भी पढ़ाई में अपना नाम आगे बड़ा रही है। इसके अलावा मु’स्लिम महिलाएं राजनीति में भी धीरे धीरे ही सही लेकिन आगे आ रही है । आज हम आपको ऐसी ही कहानी बताने जा रहे है , मैसूर की नगर निगम में एक अ’ल्पसंख्य’क मु’स्लिम म’हिला मेयर बनी है। 158 सालो के बाद यह पहली बार हुआ हैं। इनका नाम तस’नीम है। यह क्षेत्र की नगरसेवक है।

इंडियन एक्स्प्रेस के मुताबिक, तस्मिन शहर की सबसे कम उम्र की मेयर है। वो महज 31 साल की हैं। तस’नीम ने अपना जीवन मैसूर के मीना बाजार क्षेत्र में अपना जीवन बिताया है। उन्होंने अपने चाचा, जो तीन बार न’गरसेवक बने है। उनकी जगह तस’नीम ने ली है। इनके चाचा का नाम अल्हाज न’सरुद्दीन है। 2018 में, उन्होंने जनता दल के टिकिट पर फिर से चुनाव लड़ा और अपनी जीत हासिल की।

तसनीम ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि वो मैसूर को सबसे साफ शहर बनाना चाहती है। बता दे 2019 कि रैंकिंग में सबसे अच्छे शहरों की सूची में 3 स्थान रखा है। तसनीम ने कहा कि यह हमारी प्राथमिकता है। 70 में से 47 वोट पाने वाली तसनीम मैसूर महा नगरपालिका की पहली मु’स्लिम मेयर बनी हैं।तसनीम के पिता मुनव्वर पाशा एक दर्जी थे और इनकी माँ तहसीन बानो एक ग्रहणी है।

तसनीम शहर के महारानी साइंस कॉलेज फ़ॉर वीमेन से पड़ी है। वो 2013 में पार्षद भी रह चुकी है। उन्होंने कोंग्रेस के टिकिट पर अपनी जीत हासिल की थी। तसनीम का कहना है हम समर्पित अधिकारियो और कर्मचारियों की सेवा हासिल कर रहे है। हमारी प्राथमिकता शहरियों की मदद लेना है। जिनकी मदद से हमे उम्मीद है कि स्वच्छता रैंकिंग में प्रथम पुरस्कार मैसूर को ही मिले। यह हमारी कोशिश हैं।

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