मिसाल : नवेद ने की 10 साल के मासूम आदित्य की मदद, सोशल साइट पर यूजर्स कर रहे जमकर तारीफ़

यह आदित्य है, आदित्य पाँचवी क्लास में पढ़ता है। इसके पिता नहीं हैं। माँ घरों में काम करती हैं। अभी तिलक नगर मार्किट में गाड़ी में बैठा फ़ोन पर किसी साथी से बतिया रहा था। तभी गाड़ी के काँच पर आदित्य ने दस्तक दी शीशा नीचे किया तो बोला भईया यह बबल्स स्टिक ले लो। मैंने कहा बेटा कितने की है आदित्य बोला भईया 40 की एक है मैंने कहा कितनी बची हैं, आदित्य बोला भईया 4 हैं सब ले लो डिस्काउंट दे दूंगा।

मैंने कहा बेटा चारों लूंगा पर डिस्काउंट नहीं चाहिए। बोला भईया ले लो आप। जब खरीदारी करली तब मैंने आदित्य से पूछा कि बेटा कितना कमा लेता है पूरे दिन में तो बोला भईया 100 200 कमा लेता हूँ लेकिन मैं स्कूल से आने के बाद मार्किट में बेचता हूँ। जब मैंने आदित्य से कहा कि बेटा जो काम तू कर रहा है तो इस काम को कभी छोटा मत समझना यह काम दिखने में ज़रूर छोटा है पर यह उन लाखों लोगों से बेहतर है जो दूसरे के आगे हाथ फैलाते हैं।

आदित्य ने कहा कि भईया ज़िंदगी मे कभी ना तो किसी के आगे हाथ फैलाया है ना कभी फैलाऊंगा। गुरुद्वारा में ख़ा लेता हूँ ना मिले तो भूखा भी सो जाता पर भीख नहीं मांगता। इतनी कम उम्र में यह खुद्दारी और भीगी पलकों में जो चमक आदित्य की आंखों में दिख रही थी वह लफ़्ज़ों में बयान कर पाना मुश्किल है। आदित्य को अपना नाम और नंबर दे आया हूँ।

और बोल दिया कि बेटा ज़िंदगी में कभी भी किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो मुझे कॉल करना। तेरी पढ़ाई, लिखाई, खाना पीना, कपड़े लत्ते सब अल्लाह के हुक़्म से पूरा हो जाएगा। आखिर में कुछ और पैसे देकर मैंने गाड़ी का शीशा ऊपर तो चढ़ा लिया लेकिन उस मासूम की बातें जो मेरे दिल पर चढ़ी हैं उनका उतर पाना शायद मुश्किल है। नोट:-सेल्फ़ी की इजाज़त खुद आदित्य ने दी है।

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