मिलिए टीपू सुल्तान की वंशज “नूर इनायत खान” से, जिसने हिलटर की सेना को दिया था चकमा, भारत की प्रिंसेज की बहादूरी को आज भी ….

टीपू सुल्तान को कौन नही जानता, मैसूर के सुल्तान टी’पू सुल्ता’न आज भी लाखों लोगों के दिलो पर राज करते है । दुनिया का पहला मिसाइ’ल मै’न कहे जाने वाले टीपू सुल्तान की अदम्य साहस की सैकड़ो कहानियां आज भी ज्यों की त्यों लगती है । कई मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो उनकी वंशज को मिला ब्लू प्लाक से सम्मानित किया गया थ।

ये खबर है , दूसरे विश्व यु’द्ध की । दूसरे विश्व यु’द्ध में ब्रिटेन की तरफ से मित्र देशो की जासू’सी करने वाली नू’र इ’नाय’त खा’न को लन्दन में उनके पूर्व पारवारिक घर मे स्मार’क ब्लू प्लाक’ से सम्मानित किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार दूसरे विश्व यु’द्ध में पहली एशिय’न सी’क्रेट एजेंट थी। ये हर भार’तीय के लिए एक गर्व जा पल था क्योकि किसी भारती’य महि’ला को ऐसा पद मिला है।

noor inayat khan

आपको बता दे, नू’र इ’नाय’त मा’स्को में पैदा हुई , ब्रि’टेन में पली बढ़ी और ना’जि’यों के कब्जे वाले फ्रांस में अंति’म सां’स ली। नू’र इ’ना’यत खा’न दूसरे विश्व यु’द्ध के दौरान हि’टल’र के कब्जे वाले फ्रांस में जा’सू’सी के लिए अपना वेश बदलकर दाखिल हो गई थी। वहां से कई खुफि’या सू’चनाएं ब्रि’टेन को भेज रही थी। बता दे कि नू’र’ खा’न पहली महिला रेडियो ऑ’परेटर थी जिन्हें वि’श्व यु’द्ध के दौरान फ्रां’स भेजा जा रहा था ।

इतिहासकार और Spy princess: The Life of Noor Inayt Khan किताब की लेखिका श्रावणी बसु ने कहा है कि जब नूर इना’यत अपने अंतिम मिशन पर अपना घर छोड़’कर रवाना हुई तो उन्होंने एक ही सपना सोचा था कि एक दिन वह ब’हादु’री का प्रतीक बनेगी।

नू’र इना’य’त को संगीत का काफी शोक था। नूर ने वीणा बजानी भी सीखी थी। नूर अपने तीन उपनाम नोरा मेकर, मेडेलिन, जीन मरी रेनिया के नाम से भी जानी जाती थी। नूर के पिता हजरत इनायत खान टीपू सुल्तान के पड़पोते थे।

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नूर को फरवरी में एयर फ्रांसमें स्पेशल ऑपरे’शन्स कार्यकारी के रूप में भर्ती किया गया । 16-17 जून 1943 को उन्हें जासू;सी के लिए रेडि’यो ऑ’परेटर बनाकर फ्रांस भेज दिया गया। यहां पर उनका नाम मेडेलि’न रखा गया।

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