दो बुजूर्ग नमाजियों ने मस्जिद को हम’लाव’रों से बचाया, नार्वे सरकार ने बहादुरी के लिए दोनों बुजूर्गो को किया सम्मानित, जानिए

नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में हथि’या’रों से लै’स एक बंदू’क’धा’री’ ने ईद से एक दिन पहले एक म’स्जि’द में गो’ला’बा’री कर दी थी। ह’म’ले में दो लोग घाय’ल हो गए थे। पु’लिस के मुताबिक, 75 साल के बु’जो’र्गो ने ह’म’ला’वर के मंसूबो को ना’का’म कर दिया था। जब ईदुल अजहा की नमा’ज में सिर्फ 15 लोग न’माज पढ़ रहे थे। जिन्होंनें इस ह’म’ले को रोका, उन्हें आज नॉर्वे में नायक के रूप में सम्मा’नि’त किया गया है।

मोहम्मफ रफीक और मोहम्मद इकबाल नॉर्वे के बंदू’क’धा’री से निपट’ने के लिए नायक के रूप में आगे आए, जिन्होंने अगस्त 2019 मेंनॉर्वे में राजधानी ओस्लो के पश्चिममें बेरूम अल नूर इ’स्ला’मिक सेंटर पर धा’वा बोल दिया था।इन लोगो को पूरा एक साल हो गया है इसलिए इनको सम्म्मनित किया गया है।

norway mosque

बता दे कि बीते दिन ही B Townrum टाउन हॉल में एक समारोह के दौरान, उद्योग मंत्री और व्यापार, lselinNybo ने रफीक और इकबाल को पदक देकर सम्मानित किया। नॉर्वे की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सबसे ज्यादा मायने रखता है कि उन्हीने अपनी जा’न की प’रवा’ह किए बगैर म’स्जि’द’ को जान’मा’ल के नु’कसान’ से रो’का।

आपको बता दे कि रफीक को गोल्ड मेडल ऑफ ऑनर और इकबाल को सिल्वर में नोबल डीड के लिए मेडल से सम्मानित किया गया है। 65 साल के सेवानिवृत्त पा’किस्ता’नी वायु सेना अधिकारी, रफीक मोहम्मद भी उन लोगो मे शामिल थे, जब 22 वर्षित स’न्दि’ग्ध फिलिप मसीह को जब मस्जि’द में थे। जब मु’स्लिम स’मुदाय के लोग त्योहार मनाने की तैयारियां कर रहे थे।

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घाय’ल होने के बाद रफीक ने मन’सूब को नीचे गिर दिया और उसे प’क’ड़ लिया जब तक पुलि’स म’स्जिद में नही पहुची। पाकि स्तान के खानवेल के मूल निवासी इकबाल के प्रयासों ने अपरा’धि’यों पर काबू पाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नार्वेजियन मीडिया ने बताया है कि माना जाता है कि ह’म’ले से एक घण्टे पहले एक ऑन’ला’इन फॉर्म डाला गया था, जहाँ उन्होंने न्यूज़ीलैंड में दो म’स्जि’दों पर हुए हम’लों में ह’मला’वर की प्रशंsa की थी। जहां पर 51 लोग मा’रे गए थे।

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