राजस्थान की इन 5 मुस्लिम महिलाओं ने रचा इतिहास, ये ख़्वातीन बनी अपनी बिरादरी में पहली जज़ …

हमारे देश में आज से कई सालों पहले महिलाओं को तालीम देना, नौकरी करना जैसे कामों को अलग ही नज़र से देखा जाता था । या यूं कहें कि इसी वजह से लड़कियों को इनके माता पिता बहुत ही कम पढ़ाई कराते थे। जिसमें मुस्लिम समाज में ऐसा बहुत ज्यादा होता था। लड़कियों को बाहर नही आने दिया जाता था। इससे पहले की बात करे तो लड़की को जिं’दा द”फन कर दिया जाता था।

प्यारे नबी सल्लाहु अलैहि वस्सलाम ने लड़कियों को अहम मकाम दिया, उनका मर्तबा बुलंद किया और औरतों को भी अधिकार दिए उंसके बाद समाज मे सुधार हुआ । ये हमारे आका ऐ करीम सल्लाहु अलेही वस्सलम का करम है कि आज महिलाओं को इतनी इज़्ज़त दी जाती है । आज मुस्लिम समाज की लड़कियां पढ़ाई के लिए आगे आ रही है। लड़कियां अपने समाज, राज्य और देश का नाम रोशन करती है। आज सरकार भी बहुत ज्यादा अहमियत लड़कियों की दे रही है।

आज हम आपको बताने जा रहे है राजस्थान की एक ऐसी ही कहानी जिसमे 5 मुस्लिम महिलाओं ने राज्य न्यायिक सेवा में अपना नाम रोशन किया है। बता दे, पहली बार सच्चर कमेटी की रिपोर्ट ने इस का खुलासा भी किया था इसमे उन्होंने बताया कि मुसलमानों के जो भारत मे हालात है वो दलितों से भी बदतर है। मुसलमान आज शिक्षा, बेरोजगारी , गरीबी से सबसे पीछे है।

राजस्थान की 5 मुस्लिम बेटियों का राज्य न्यायिक सेवा में चयन हुआ है। इन बेटियों ने यह कर बता दिया कि पढ़ाई करने वालो के लिए ध’र्म मायने नही रखता है। इन पांचों ने अपनी कामयाबी को हासिल किया है। इन बेटियों ने भारत का नाम रौशन किया है। राजस्थान और हरियाणा में शिक्षा का स्तर बहुत ही नीचा है। उन हालातो से लड़कर भी इन बेटियों ने अपना नाम ऊँचा किया है।

rajasthan

मुस्लिम समाज शिक्षा की लिहाज से 70 साल बाद भी दुसरो की तुलना में पिछड़ा हुआ है। यह है 5 बेटियां, जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे है । सानिया मनिहार, साजिदा, सना, हुमा खोहरी, शहनाज खान के अलावा एक मुस्लिम लड़का जिसका नाम है फैसल । इन लोगो ने RJS की परीक्षा उत्तीण की है। 30वी रेंक पर आई सानिया मनिहार की कामयाबी इसलिए अहम है क्योकि मनिहार समुदाय में सानिया के जरिये पहली बार कोई प्रशासनिक अधिकारी के पद तक पहुँचा है।

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