रोहिंग्या मुस्लिमों पर नई मुसीबत, म्यामर सरकार कर रही इन अधिकारों से वंचित, जानिए

म्यामा’र में बौ’द्ध और मु’स’ल’मान के बीच अक्सर त”नाव देखने को मिलता है । ऐसे ही एक हिं’सा जो 2021 में घ’टि’त हुई थी मय’मार देश के पश्चिमी राज्य रखाइ’न की राजधानी सितवे में मई 2012 से बौद्ध और रो’हंगिया मु’सल’मानों के बीच घ’ट’ना कई बार देखने को मिल चुकी है ।

खबर म्यामार से है जहाँ पर चुनाव लड़ने को लेकर वि’वाद सामने आया है । म्यामार में रहने वाले रोहिंग्या नेता अब्दुल रशीद को चुना’व में नही लड़ने दिया जा रहा है अब्दुल रशीद का कहना है उनके पास यहां की नाग’रिकता होने के बावजूद भी ऐसा होरहा है। अब्दुल के पिता सिविल सर्वेट थे।

rohinga muslim news

अब जब देश मे नवम्बर में आने वाले चुनाव होने जा रहा है तो तब बिजनेसमैन अब्दुल को यह कहकर चु’नाव नही लड़ने दिया जा रहा है कि वो विदेशी मूल के है। ‘म्या’मार में 8 नवम्बर को चुनाव है।आम चुनाव में इस तरह की उ’म्मिद की जाती है कि नोबेल विजेता आंग सन सु की नेतृत्व में लो’कतां’त्रिक सर’कार बनेगी।

बता दे कि अब तक सरकार ने 6 रो’हिंग्या नेता’ओ के आवेदन भी खारि’ज कर दिए है। लेकिन इन सब के बीच ये नेता इस बात को साबित नही कर पा रहे है है कि उनके जन्म के वक्त उनके माता पिता म्यामार के थे या फिर नही?

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आम चुनाव में इस बात को प्रमाण पत्र के द्वारा स्पष्ठ करना पड़ता है कि उनके माता पिता भी म्यामार के ही थे। ब्रिटेन में बर्मा रो’हिंग्या संग’ठन के प्रमुख थनु खीन ने कहा है कि म्यामा’र में हर नागरिक के लिए जा’तीयता और ध’र्म का कोई मतलब नही है।यह चुनाव में सभी को भाग लेने का अवसर मिलने चाहिए।

अब्दुल रशीद ने आगे बताया ह की हमारे पाससरकार द्वारा जारी सभी दस्तावेज भी है लेकिन इसके बावजूद भी सरकारी बात को अस्वीकार कर रहे है कि मेरे पेरेंट्स म्यामार के नागरिक थे।मैं इसे लेकर बहुत ही खराब महसूस कर रहा हूं और इस बारे में चिंति’त भी हू

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