इ’स्रा’इली र’ब्बि’यों ने किया दावा, इ’स्ला’मिक इ’तिहास की पहली म’स्जिद इ’स्रा’इल में मौजूद, त’थ्य जा’नकर है’रान रह जा’ओगे

मु’स्लिम ध’र्म को मानने वाले लोग न’माज पढ़ने के लिए म’स्जिदों में जाते है। जैसा कि आप सभी जानते है कि दुनिया की सबसे बड़ी म’स्जिद स’ऊदी अरब में मौजूद है । मु’स्लिमो का सबसे पवित्र स्थल म’क्का और मदीना श’रीफ है। इसके बाद म’स्जिदे अ’क्सा है। जिसे बै’तू’ल मु’क्क’दस के नाम से भी जानते है । यह म’स्जि’द मु’स्लि’मो के लिए पहले क़ि’ब’ले ए अ’व्वल हुआ करती थी फिर बाद में म’स्जि’द ए न बवी कि’बलाए अव्वल हुई ।

बता दे, बैतू ल मुक्क दस का इतिहास अ’रबों साल पुरा’ना है, ये’रुश’ल’म में मौजूद बै’तूल मु’क्कदस मु’स्लि’मों का प’वित्र स्थ’ल माना जाता है । यहां पर ई’साई और य’हूदी भी अपना स्थ’ल बताते है । सालों से येरु’शल’म की ल’ड़ाई मु’स्लि’मों और य’हूदि’यों के बीच जारी है । यह लड़ाई म’स्जिद ए अक़’सा को लेकर है । बता दे, म’स्जि’द ए अक़’सा वही जगह है जहां से हमारे प्यारे आका सल्लाहु अलैहि वस्सलाम मे’राज के स’फ़र को निकले थे ।

आज भी कही जगह ऐसी है ,जहां पर म’स्जि’दों के नि’शान मिल जाते है।बता दे कि इ’जरा’इली रे’गिस्तान में माना जा रहा है कि 7 वी या 8 वी शताब्दी की एक बहुत पुरानी म स्जि द की खोज की गई है। इसरायली पुरातात्विक ने यह बात मीडिया को बताई है । इ’जरा’इ’ली विशेषज्ञों के मुताबिक बताया गया है कि यह एक छोटी म’स्जि’द है। जो 7 वी या 8 वी शताब्दी की है।

उन्होंने कहा कि” हमारे पास न’मा’ज के लिए पुरानी घर के सा’क्ष्य है। ऐसा लगता है कि यह कि’सानों के लिए बनाई गई हो”। खु’दाई निर्देशकों के अनुसार बताया गया है कि, म’स्जि’द एक आयता’कार खु’ली हवा की इ’मारत थी।जिसे मेह’राब, दक्षिण की ओर , मक्का की और स्थित है।

खुदाई के दौरान, बीनजंटीन अवधि के अंत से एक खेत के अवशेष, और इस्ला’मी काल की शु’रुआत से एक छो’टी सी बस्ती भी मिली है। जहां पर पहले कोई रहता होगा। 636 ईसवी की अरब विजय के बाद, इ’जरा’इ’ल में इ’स्लाम के आ गमन की शुरुआत से ज्ञात यह सबसे प्रारम्भिक म स्जि दों में से एक हैं।

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