सऊदी अरब से आई प्रवासियों के लिए बु’री ख़बर, इस विभाग में अरब के लोग ही काम कर सकेंगे

आज के भारतीय मुसलमानों की बात करें तो वह ज्यादा पढ़ लिखते नहीं बल्कि खुद का पुश्तेनी काम, मजदूरी करते हुए दिखाई देते है। यह बातें सच्चर कमेटी की रिपोर्ट से भी साबित होती है कि मुसलमान की बीते 60 सालों में पढ़ाई से लेकर नॉकरी के स्तर पर देश मे सबसे निचले स्तर या यूं कहें राज्य और केंद्र सरकार के औसत आकंड़े से भी कौसों दूर दिखाई देता है । बात करें , सरकारी नॉकरी की तो मुस्लिम की तादाद 3-4 फीसद है , यह आंकड़ा आप सच्चर कमेटी में भी देख सकते है ।

अगर सरकारी नॉकरी के टॉप जॉब पर जाए तो यह आंकड़ा 1 फीसद तक एह जाता है लेकिन जैसे जैसे सरकारी नॉकरी के ग्रेड में कमी होती जाती है वैसे वैसे मुस्लिम 1 फीसद से बढ़कर 3-4 फीसद होते है । यह आंकड़ा मुस्लिम समुदाय के लिए डरावना से प्रतीत होता हुआ दिखाई देता है। इसलिए भारत के मुस्लिम गल्फ देशों के सहारे रहते है और कम पढ़ लिखकर वही जॉब के लिए निकल जाते है।

सऊदी में लाखों सऊदी के हर विभाग में भारतीय जॉब करते है। लेकिन सऊदी से अब ऐसी खबर आ रही जिसको सुनकर आओ जरूर हक्के बक्के राह जायेगे । श्रम और सामाजिक विकास मंत्रालय ने मार्च से सभी दन्त चिकित्सा नॉकरियो को सऊदी के लोगों को ही देने करने का फैसला लिया है। मंत्रालय के प्रवक्ता खालिद अबा अलखिन ने यह बात कही । प्रवक्ता ने कहा कि दन्त चिकित्सा नोकरियों का राष्ट्रीयकरण दो चरणों में लागू किया जाएगा।

सऊदी प्रेस एजेंसी ने कहा कि 26 मार्च 2020 से शुरू होगा। इसका उद्देश्य होगा कि 25 फीसदी नोकरियों के सऊदीकरण पर है। दूसरा 30 फीसदी नोकरियों के स्थानीयकरण को लक्षित करेगा। आबा अलखिन ने कहा कि दन्त चिकित्सा नोकरियों का सऊदी 2018 में घोषित नोकरियों के राष्ट्रीयकरण की मंत्रालय की पहल के भीतर था।

इस पहल की शुरुआत स्वास्थ्य मंत्रालय, सऊदी कमीशन फॉर हेल्थ स्पेशलिटी द कॉउन्सिल ऑफ द चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री और ह्यूमन रिसोर्स डेवेपमेपमेंट फ्रंड की साझेदारी में की गई थी। उनका कहना है कि सरकारी और निजी क्षेत्र में नोकरियों का राष्ट्रीयकरण करने का उद्देश्य महत्त्वपूर्ण विशेषयज्ञता में सऊदी नागरिकों को रोजगार के अवसर प्रदान करना था।

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