मुसलमानों को इल्म की राह दिखाने वाले सर सैयद अहमद खान, अहमद को महात्मा गाँधी ने बताया था शिक्षा जगत का ….

भारतीय इतिहास में कुछ लोगो का यह मानना था कि मुस्लिम आधुनिक शिक्षा को अपनाने में झिझक करते थे। लेकिम सर सैयद अहमद खा ने इस धारणा को तोड़ा और मुस्लिमो को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने में बड़ी भूमिका को निभाया है। 27 मार्च को सर सैयद अहमद खा की पुण्यतिथि को मनाया भी गया है ।

उन्होंने 1898 को दुनिया से अलविदा कह दिया था। उनकी स्थपित की हुई आज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने अपना नाम ऊंचाइयों तक छू लिया है। आज सर सैयद अहमद आज ही के दिन दुनिया को अलविदा कह ता इसलिए आज यूनिवर्सिटी में फज्र की नमाज के बाद कुराखवानी भी की गई है।

sir syed ahmed khan

इस अवसर पर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने सर सैयद अहमद खा के मिशन को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि हमे कोरोना की गाइड लाइन का पालन करना चाहिए। इस मौके पर उर्दू अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ राहत अबरारने कहा है कि मुस्लिम शिक्षा के साथ साथ उस दौर में सर सैयद अहमद खा ने भारत को स्पेन बनने से रोका था।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 1875 में सर सैयद अहमद खान ने की थी । बता दे कि केम्ब्रिज विश्वविद्यालय की तर्ज पर ब्रिटिश राज के समय बनाया गया पहला उच्च शिक्षण संस्थान था। पहले इस कॉलेज का नाम मुसलमान एंग्लो ओरिएंटल था ।

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जिसे बाद में अलीगढ़ मुस्लिम यूनि’वर्सिटी के नाम से दुनियाभर में जाने लगा। इस यूनिवर्सिटी से भारत और पा’किस्तान के कई दिग्गज नेताओं ने भी पढ़ाई की है।जिसने भारत के पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन, पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान आदि शामिल है ।

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