आपको हारने नहीं देगी IAS रियाज़ अहमद की कहानी, 12 वी में फेल होने के बाद दोस्तों ने किया था अपमान,पढ़िए

इंसान चाहे तो अपनी मेहनत, लगन, हौसले से अपनी जिंदगी में उजाला ल सकता है या अंधेरा ल सकता है। बेशक इसका एक कारण उसका नसीब भी हो सकता है। लेकिन अगर कोई पड़ने वाले के पास आगे बढ़ने के ऑप्शन ही खत्म हो जाए तो वो हार भी मान लेता है। जिनको अपनी जिंदगी में कुछ करने का जज्बा होता है वो पीछे नही हटता है। आइये तो हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसी ही कहानी जिन्होंने अपनी करियर में मिली निराशा के बाद भी अपनी जिंदगी को बदल डाला है।

यह शेर तो आप ने सुना ही होगा” खुदी को कर बुलन्द इतना ही हर तकदीर से पहले, खुदा बन्दे से पूछे बता तेरी रजा क्या है।” यह शेर है अल्लामा इकबाल का। इस शेर को सच साबित किया है नागपुर जिले के सैयद रियाद अहमद ने। जिसने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन में 261वी रैंक हासिल कर के आईएएस बना है। इन्होंने अपनी असफलताओं के बाद भी हार नही मानी और अपने सपने को पूरा कर दिखाया है।

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रियाज अहमद एक ऐसे परिवार से आते है । जहाँ बच्चे को पढ़ने की उम्र में ही घर की जिम्मेदारी डाल दी जाती है। सैयद के पिता ने 3 कक्षा तक कि पढ़ाई की और माँ ने 7 कक्षा तक पढ़ाई की। सैयद ने अपने इंटरव्यू में बताया कि वो 12 कक्षा में फेल हो गए थे। तब उन्होंने बहुत ज्यादा अपमान सहना पड़ा था। लेकिन इतनी मुश्किल होने के बाद भी उन्होंने हार नही मानी।

12 के बाद उन्होंने मेहनत की ओर आगे बढ़ते गए। सैयद ने पीछे मुड़कर नही देखा। पॉलिटिक्स सब्जेक्ट में कॉलेज में एडमिशन लिया। आईएएस की तैयारी करने वो 2013 में पुणे चले गए। 2014 में वह आईएएस पहली परीक्षा में ही बाहर हो गए। पहली परीक्षा होने के बाद उन्होंने 2015 में प्रिलिम्स दिया और वापस फेल हो गए।

सैयद ने बताया कि नेगेटिव मार्किंग के चलते उनके नंबर कम आए। 2016 में उन्हीने प्री और मेंस तो निकाल लिया लेकिन इंटरव्यू में निराशा हाथ लगी। 2017 में उन्होंने वापस पेपर दिया लेकिन फेल हुए। इनके पिता ने कहा कि छोड़ दो यह सपना। यह सपना सपना ही रहेगा। लेकिन कहते है ना जब किस्मत बदल जाए तब कोई कुछ भी नही कर सकता है।

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5 अप्रैल 2018 को वो दिन था। जब सैयद को अपनी मेहनत का फल मिल गया था। उन्होंने इस बार पूरे देश मे 261वी रेंक हासिल की। सैयद ने अपने पिता को फोन किया । उन्होंने अपने पिता को भा,वुक होकर यह ख़ुशख़बरी सुनाई। आप भी रियाज अहमद की तरह अपने सपने को पूरा कर सकते है बशर्ते मेहनत भी उसी तरह से हो जिस प्रकार का सपना हो ।

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