अफगानिस्तान में होगा इस्लामि’क कानू’न लागू- अमेरिका से बोला तालिबा’न, अमेरिका-तालि’बान शांति समझौते में मौजूद रहे अमेरि’की विदे’श मंत्री ने कहा…

2001 में अमेरिकी जिस इरादे से अफ’गा’नि’स्ता’न में Ghusa था उसे उम्मीद नही थी 20 साल वो वहां से निकलने के लिए आगे उन्ही ता’लि’बा’नियों के साथ शांति वार्ता करने पर मजबूर हो जाएगा । अफ’गानि’स्तान का ता’लि’बानी समूह 2001 के अमेरिका में 9 / 11 ह’म’ले के बाद से ही लगातार अमे’रिकि’यों के नि’शा’ने पर रहा । अ’मे’रि’का ने इनका खा’त्मा करने के लिए अपनी फौ’जें यहां उता’र दी ।

इसके बाद अ’मे’रि’की फौ’जो और ता’लिबानियों में करीब 20 वर्षों तक चले संघ’र्ष के बाद अ’मे’रि’की इनसे बात करने के किये तैयार हुआ । अंतर’रा’ष्ट्री’य मी’डि’या की माने तो इनकी मध्य’स्थ’ता पा’कि’स्ता’न, कतर के सह’यो’ग से हो रही है । ‘अ’मे’रि’की वि’दे’श मंत्री माइ’क पोपमि’यो जब क’तर पहुँचे तो साफ हो गया कि दू’सरी शां’ति वार्ता के लिए अमे’रि’का तैयार है ।

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याबी आगे देखना होगा किस तरफ अमे’रिका अपनी फौ’जो को अफगा’न से निकलेगा । कतर में हुई दूसरी शांति वार्ता में जो अं’त’रा’ष्ट्री’य मी’डि’या से ख़”ब’रे साम’ने आई उसमे कहा गया है कि ता’लि’बा’न स’मूह अफ’गा’नि’स्तान’ में इ’स्ला’मि’क शासन चाहता है। वो इसे लेकर पूरी कोशिश भी कर रहा है।

क़तर की राजधानी दोहा में अ’फ’गा’नि’स्तान सर’कार ओर तालि’बा’न के बीच चल रही शांति बातचीत के लेकर यह खबर सामने आई है। ता’लि’बा’न के संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरा दर ने कहा है कि मैं चाहता हूं कि सभी अफ’गानि’स्तान से जुड़ी अपनी बातचीत में इ’स्ला’म पर विचार करे।

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इसी दौरान उद्धघाटन समारोह में बोलते हुए अमेरिका विदेश मंत्री माइक पॉमपियो ने प्रतिद्वंद्वी पक्षो से आने वाले कल की पीढ़ियों के शांति के लिए बातचीत के अवसर का ला’भ उ’ठाने का निवेदन भी किया है।

उन्होंने इस बात का ध्यान दिलाया है कि अफगा;निस्ता’न की पसंद आने वाले कल की राजनीतिक प्रणाली आपको ही बनाना है। इस बात को लेकर अ’मेरि’का को समझौते का भरोसा भी है। अफ’गानि’स्तान की शा’न्ति परि’षद के प्रमुख, अब्दुल्ला ने कहा है किअगर दोनो पक्ष हाथ मिलाते है तो आने वाले वक्त मेदेश मौजूदा हालातो के दुःख ख’त्म हो जाएंगे।

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तालि’बान आंदोल’न जिसे तालि’बान के नाम से भी जाना जाता है । यह एक सु’न्नी इस्ला’मिक आध’रवादी है। जिसकी शुरुआत 1994 ने दक्षिणी अफगा’निस्ता’न में हुई थी। तालि’बान इस्लामिक कट्टरपंथी को विचार’धारा पर यकीन करता है।

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