“बुलाती है मगर जाने का नहीं”, कहने वाले राहत इंदौरी आखिरी सफर पर हुए रवाना, पढ़े उनकी कुछ बेहतरीन शायरी

उर्दू के मशहूर शायर राहत इंदौरी का हार्ट अटैक के कारण इंदौर के हॉस्पिटल में इंतेक़ाल हो गया । मशहूर शायर रहे राहत इंदौरी के जाने के बाद कई नामचीन लोगों के साथ उनके चाहने वालो ने भी दुःख प्रकट किया है। राहत इंदौरी के अचानक इस दुनिया से कूच कर जाने के बाद हर कोई स्तब्ध है ।और उनके कहे शायर के द्वारा उन्हें याद कर रहा है । बता दे, राहत साहब उर्दू शायरी की जान कहे जाते थे, उनके हर शायर को दमदार और बड़े वजनदार होते थे ।

राहत इंदौरी के यू अचानक चले जाने से उनका हर चाहने वाला उनका हर आशिक़ सदमे में है। कई सालों तक महफिलों और मुशायरों की रौनक रहे राहत साहब का यू चला जाना अच्छा नही लग रहा है । बता दे, राहत इंदौरी को सुबह ही कोरोना के लिए औरोबिंदो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया ।

urdu poet rahat indori

उन्हें 2 बार हार्ट अटैक आया । औरोबिंदो हॉस्पिटल के डॉक्टर विंनोद भंडारी ने कहा कि उन्हें नमोनीये की शिकायत भी थी ।बता दे, आज सवेरे ही राहत इंदौरी ने कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी ट्वीट कर दी थी । उन्होंने ट्वीट में कहा था कि कोविड के शुरुआती लक्षण के बाद उनका कोरोना टेस्ट किया गया उंसके बाद उनकी रिपोर्ट् कोरोना की पॉजिटिव आई है।

उन्होंने आगे कहा था कि मैं औरोबिंदो हॉस्पिटल में भर्ती हु मेरे लिए सभी दुआ करे ताकि में जल्द से जल्द कोरोना हो हरा दू । राहत साहब ने अपने चाहने वालो से अपील की थी उनकी खैरियत ट्विटर और फेसबुक के माध्यम से मिलती रहेगी उनके घरवालों और उन्हें काल नही करे ।

urdu poet rahat indori

राहत इंदौरी कोरोना काल में शायरी के माध्यम से लोगो को जागरूक करते दिखे थे । अब जब राहत साहब इस दुनिया से जा चुके है तो उनके चाहने वाले उनकी शायरी और उन्हें दोनों को याद कर रहे है । राहत इंदौरी के कुछ बेहतरीन नमूने आपके सामने पेश है ।

जो आज साहिबे मसनद है कल नही होंगे।
किरायेदार है जाती मकान थोड़ी है ।।

सभी का खून शामिल है यहां की मिट्टी में । किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है ।

बुलाती है उधर जाने का नही ।
वो दुनिया है उधर जाने का नही ।।

है दुनिया छोड़ने मंजूर लेकिन
ये हिंदुस्तान छोड़ने का नहीं

जनाजे ही जनाज़े है सड़क पर
अभी मर जाने का दिल नही

सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं घर खाली हाथ जाने का नहीं

मिरे बेटे किसी से इश्क़ कर
लेकिन हद से गुजर जाने का नहीं

वो गर्दन नापता है नाप ले
लेकिन जालिम से डर जाने का नहीं

सड़क पर अर्थिया ही अर्थिया है
अभी माहौल मर जाने का नही

वबा फैली हुई है हर तरफ,
अभी माहौल मर जाने का नही

जुबा तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हु जवाब तो दे

शाखों से टूट जाए वो पत्ते नही है हम
आंधी से कोई कह दे औकात में रहे

एक ही नदी के है दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना जिंदगी से,मौत से यारी रखो

प्यास तो अपनी सात समंदर जैसी है
नाहक हमने बारिश का एहसान लिया ।

Leave a Comment