वीर अब्दुल हमीद : अकेले जीप पर बैठकर पाकिस्तान के उठाए थे 7 टैंक, पेड़ के पत्ते खाकर …

पा’किस्ता’न के साथ साल 1947-49 के दौरान हुई जं’ग में कई भारती’य से’नि’को ने अपनी श’हाद’त भी दी है। साल 1965 में पाकि’स्ता’न की और से एक जं’ग को छे’ड़ दिया गया । यह यु’द्ध भार’त देश के लिए प’रम’वीर’ की जां’बाजी के लिए भी इतिहास के पन्नो में दर्ज हो गई। और उन्हें आज भी याद किया जाता है।

इन श’हा’द’तों में शामिल वीर अ’ब्दुल ह’मीद जिन्हीने एक नही बल्कि पा’कि’स्ता’न के 8 टैं’कों को ब’र्बा’द कर दिया था। यूपी के गाजीपुर में जन्मे धर्मपुर गांव में 1 जुलाई 1933 को अब्दु’ल ह’मीद का जन्म हुआ था। उनके पिता मोहम्म’द उस्मा’न सिला’ई का काम भी किया करते थे।।20 साल की उम्र में अब्दुल हमीद ने वाराणसी में भा’र’ती’य से’ना की वर्दी पहनी थी।

veer abdul hameed 2021

1965 में जब भारत पा’कि’स्ता’न यु’द्ध की घ’ड़ी करीब आई तो उस वक्त वो अपने घर छुट्टी पर घ’र आए हुए थे। लेकिन पा’क में त’ना’व’ बढ़’ते को देखते हुए उनको वाप’स बुला लिया गया और उन्होने बिना देर किए सरहद पर भारत की र’क्षा करने के लिए चल पड़े। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब्दुल हमीद की जीप 8

सितंबर 1965 को सुबह 9 बजे चीमा गांव के बाहरी इलाके में गन्ने के खेती से गुजर रही थी। वह जीप के ड्राइवर वाली बगल की सीट पर बैठे हुए थे।उनको पहले टैंकों की आवाज भी सुनाई दी। कुछ ही देर बाद उनको टैंक भी दिख गए।वह टैंकों के अपनी रिकोयल्स गन की रेंज में आने का भी इंतजार करने लगे

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और गन्नो की आड़ का फायदा उठाते हुए उन्होंने फा’य’र भी कर दिया। कहा जाता है उन्होंने पा’कि’स्ता’न के अभे’द माने जाने वाले टें’क’रो को उ’ड़ा’ दिया था। 28 जनवरी 2020 को भारतिय डाक विभाग के सम्मान में 5 टिकट के सेट में 3 रूपए का डाक टिकट जारी भी उनके नाम जारी किया गया था।

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