हर मु’स’ल’मा’न को पहली अ’ज़ा’न का ये कि’स्सा पढ़ना चाहिए , प्या’रे आ’का (स.अ.व.) ने फ़रमाया

अ’स्स’लामु आ’लै कुम दोस्तों। आज हम आपको अ’ज़ान के बारे में जा’नकारी देंगे। यानि अ;ज़ा’न की शुरुआत कैसे हुई और कब हुई। इ’स्लाम ध’र्म में मु’स्लिम रो’ज़ पां’च वक़्त की न’माज पढ़ते है , जिसमें न’माज से पहले अ’ज़ान दी जाती है। अ’ज़ान देने का मकसद मु’स्लि’मों को न’मा’ज़ प’ढ़’ने के लिए बु’लाने के तौर पर होता है। अ’जान न’बी ए क’रीम मो’हम्म’द स’ल्ल’ल्ला’हु अ’लै’हि व’स’ल्ल’म में अ’ह’द मु’बा’र’क में शुरू हुई। म’दी’ना श’री’फ में शुरू हुई, यहां पर हम ह’दीस श’रीफ पेश कर रहे है।

अ’जा’न की शुरुआत हुई कैसे हुई ? ह’ज’र’त ना’फ़े र’जि’अ’ल्ल’हु अ’न्हा बयान करते है कि जब मु’स’ल’मा’न म’दी’ना श’री’फ आए तो वो न’मा’ज के लिए ज’मा हुआ करते थे। न’मा’ज के लिए अ’जा’न नही होती थी। एक रो’ज उन्होंने इस सि’ल’सि’ले में बात की तो कुछ लोग कहने लगे कि ई’सा’इ’यों की तरह ना’कु’स बना लिया जाए। बा’ज लोग कहने लगे कि य’हु’दि’यों के सीं’ग की तरह बि’गु’ल बना लिया जाए।

इसके बाद में उ’म’र र’जि’अ’ल्लहु त’आला कहने लगे कि तुम किसी शख्स को क्यो नही मु’कर्रर करते की वो न’माज के लिए मु’नादी करे यानि कुछ पढ़े। इसके बाद नबी ए करीम सल्लाहु अलैहि वस्सलम ने फ़रमाया बिलाल नमाज के लिए मुनादी करो (सही बुखारी ,हदीस नंबर – 569)। ह’ज़’र’त इ’ब्न अ’मीर ब’न अ’नस अपने एक अंसारी चाचा से बयान करते है कि न’बी क’री’म स’ल्लल्लाहु अलेही व’स’ल्ल’म को ये म’सला दर’पेश आया कि लोगो को किस तरह न’मा’ज के लिए ज’मा किया जाए। किसी ने कहा कि न’मा’ज के वक्त झं’डा न’सब कर दिया जाए।

जब वो उसे देखेंगे तो एक दूसरे को बता देंगे। हमारे आ’का ए क’रीम स’ल्लाहु अ’लैहि वस्सलम को ये तरीका पसंद ना आया। रा’वी बयान करते है कि इसके बाद बि’गुल का भी न’माज़ के लिए जिक्र हुआ। जि’हाद कहते है कि बिगु’ल ब’जा’ने वाला तरीका भी हमारे आ’का ए क’री’म स’ल्ला’हु अलै’हि व’स्सल’म को ये भी तरीका पसंद नही आया। अ’ब्द बि’न जे’द बि’न अ’ब्द रु’बा वहां से निकले तो आप स’ल्ल’ल्ला’हु व’स’ल्लम के इसी मामले की फिक्र खाए जा रही थी कि उन्हें ख़्वा’ब में अजान दिखा’ई गई।

रावी कहते है कि आप स’ल्लल्ला’हु अले’ही व’स’ल्ल’म के पास आए तो उन्हें अपने बयान करते हुए कहने लगे कि, मैं अपनी नीं’द और बे’दा’री की द’र’मि’या’न हालत में था। एक शख्स आया और मुझे अ’ज़ा’न सिखाई। रावी कहते है कि इस से क़ब्ल ह’ज़’र’त उ’म’र र’जि’अ’ल्ल’हु अ’न्हा भी ये ख़्वाब देख चुके थे, लेकिन उन्होंने उसे बी’स रोज तक छुपाया गया। किसी से बयान ना किया।

रावी कहते है फिर उन्होंने ह’ज़’र’त मो’ह’म्म’द स’ल्ला’हु अ’लै;हि व’स्स’ल’म को अपने ख़्वाब के बारे में बयान किया तो र’सू’ल अ’ल्लाह स’ल्लल्ला’हु अ’लेही व’सल्ल’म फरमाने लगे। तुम्हे ख़्वा’ब बयान करने से किस चीज़ से मना किया था। तो उन्होंने जवाब दिया अ’ब्द। उंसके बाद र’सूल क’रीम स’ल्ल’ल्ला’हु अ’ले’ही वस’ल्ल’म ने फरमाया। बि’लाल उ’ठो और देखो तुम्हे जै’द क्या कहते है? तुम भी इसी तरह करो, बि’ला’ल र’जि’अल्लहु अ’न्हा ने अज़ान सुनाई। (इब्ने दाऊद ,हदीस नंबर 420)। सु’ब’हा’न अ’ल्ला’ह।

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