मिलिए मे’जर जनरल शाहनवाज़ खान से, जिन्होंने लाल क़िले से ब्रि’टिश हु’कूमत का झंडा उतारकर तिरंगा लहराया, जानिए

लाल किला का इतिहास काफी पुराना है। लाल किला देश की राजधानी दिल्ली में स्थित है। क्या आपको बता है कि लालकिले पर सबसे पहले झंडा किसने लहराया था? यह वो शख्स है मेरठ में 4 बार सांसद के लिए चुना गया था। जो लंबे समय से केंद्रीय मंत्री में रहे है। पा’कि स्ता’न के खिलाफ लड़ाई के दौरान जब देश को ये जानकारी हुई तो कोहराम मच गया। केंद्रीय मंत्री से इस्ती’फा मांगा गया लेकिन त’त्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने न केवल उनका ब’चाव किया बल्कि इस्तीफा लेने से मना भी कर दिया।

आज हम आपको उस नाम से रूबरू कराने जा रहे है। यह नाम एक मुस्लि’म शख्स का हैं। आजाद हिंदुस्तान में सबसे पहले ब्रिटिश हुकूमत का झंडा उतारकर तिरंगा लहराने वाले शाहनवाज खान है। 23 साल तक केंद्रीय मंत्री रहे। 1952 में पार्लियामेंट में सेकेट्री,रेलवे मिनिस्टर बने। 1957 से लेकर 1964 तक खाद्य और कृषि मंत्री रहे ।

शाहनवाज खान ने लंबे समय तक विविध मंत्रालय संभाले और देश की तरक्की का तोहफा बख्शा है। आज देश उनको भूल गया है। बता दे कि नेहरू ने स्वयं शाहनवाज को मेरठ जिले से चुनाव लड़ने के लिए भेजा था। शाहनवाज खान को जनरल साहब भी कहते है। रक्षापूरम से आगे एडब्लूएचओ कॉलोनी में जनरल साहब के बहु और पोते रहते है।

उनका कहना है कि जिस शख्स ने आजादी के समय इतना सब कुछ किया लेकिन आज उनको भुला दिया गया है। जनरल खान के बड़े बेटे आदिल खान का कहना है कि हमने कई बार सरकार और प्रशासन से कहा है जनरल साहब का स्मारक बनाया जाए।लेकिन कोई जवाब नही आया है। हमने ही 2010 में जनरल शाहनवाज मेमोरियल फाउंडेशन बनाया।

हर साल उनकी बरसी पर जामा मस्जिद के पास मजार पर आयोजन किया जाता है। मेजर जनरल शाहनवाज खान का जन्म 24 जनवरी 1914 को रावलपिंडी, पाकिस्तान के मटौर में हुआ था।इनके पिता झनझुआ राजपूत कैप्टन सरदार टिका खान थे।वह 1940 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में अधिकारी नियुक्त हुए।

आज भी लालकिले में रोज शाम को छः बजे लाइट एन्ड साउंड का जो कार्यक्रम होता है, उसमें नेताजी के साथ शा’हनवाज की भी आवाज हैं। बता दे शाह’नवाज खा’न का पूरा परिवार रावल पिंडी में रहता हैं। आजदी के समय जब देश का बंटवारा होने लगा तो खान भारत आ गए।

लेकिन शा’हनवाज का परिवार नही आया था। नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रि’मंडल में शामिल किया। 1983 में शा’हनवाज का दिल्ली में नि’धन हो गया । उनकी याद में बनाया गया मे’मोरियल फाउंडेशन गरीब बच्चों की पढ़ाई लिखाई में मदद करता है। इस फा’उंडेशन का मुख्या’लय नई दिल्ली के जामिया मिलिया के इलाके में हैं।

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